विकास नंद/ सर्वव्यापी/

प्रदेश में यूरिया और डीएपी खाद की किल्लत को लेकर उठ रहा विवाद अब और गहराता जा रहा है। जहां साय सरकार और प्रशासनिक अधिकारी लगातार खाद का पर्याप्त भंडारण होने का दावा कर रहे हैं, वहीं अब उनके ही समर्थित जनप्रतिनिधियों के पत्र इन दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं।
जिला पंचायत महासमुंद की अध्यक्ष मोंगरा किशन पटेल द्वारा कलेक्टर को भेजे गए पत्र ने प्रदेश में खाद संकट की हकीकत उजागर कर दी है।
पत्र में साफ लिखा गया है कि सरायपाली ब्लॉक की प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में आज दिनांक तक किसानों को खाद उपलब्ध नहीं हो सका है। नतीजतन किसान मजबूरी में बाजार से महंगे दामों पर खाद खरीदने को विवश हैं।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि किसान खाद खरीदने के लिए समितियों में मिलने वाले ऋण का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन बाजार से महंगे दाम पर खाद खरीद लेने के बाद उनकी अन्य आवश्यकताएं जैसे दवाई और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। इससे धान उपज पर भी बुरा असर पड़ रहा है।कांग्रेस पार्टी लगातार इस मुद्दे को लेकर सड़कों से लेकर सदन तक सरकार को घेर रही है।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि प्रदेश में खाद की कृत्रिम कमी और कालाबाजारी चरम पर है, जिससे किसान ठगा जा रहा है।
अब इस मसले पर भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष का पत्र सामने आने से विपक्ष के आरोप और मजबूत हो गए हैं।किसानों की मांग है कि सरकार और प्रशासन तुरंत कदम उठाए और प्राथमिक सहकारी समितियों के माध्यम से खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करे।
पत्र में भी जिला पंचायत अध्यक्ष ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि समितियों में तत्काल खाद उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसानों की मुश्किलें कम हो सकें।
खाद संकट पर सियासत गरमा गई है और अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या ठोस कदम उठाती है।