बिलासपुर/भागवत प्रसाद/ ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार में निगम-मंडल, आयोग, बोर्ड तथा सहकारिता विभाग से जुड़ी संस्थाओं के साथ ही संसदीय सचिवों की नियुक्ति का सवाल फिलहाल पेचीदा बन गया है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव और प्रदेश प्रभारी नीतिन नवीन ने सूची लगभग फाइनल कर दी है, लेकिन इसके बावजूद अब तक आधिकारिक घोषणा नहीं हो पाई है।सरकारी गलियारों में यह सवाल गूंज रहा है कि जब सूची तैयार हो चुकी है, तो फिर उसे सार्वजनिक करने में देरी क्यों की जा रही है? न तो भाजपा संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारी कोई स्पष्ट जवाब दे पा रहे हैं और न ही मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारी। इससे कार्यकर्ताओं में असमंजस और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।इधर, श्राद्ध पक्ष शनिवार से शुरू हो रहा है और शुक्रवार से रविवार तक लगातार सरकारी अवकाश रहेगा। ऐसे में नियुक्तियों और पदभार ग्रहण की प्रक्रिया कब होगी, यह बड़ा सवाल है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यदि गुरुवार तक नियुक्तियां नहीं होतीं, तो इसका सीधा असर मुख्यमंत्री की साख और संगठन की कार्यशैली पर पड़ेगा।पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री को सलाह देने वाले कुछ लोग उनके राजनीतिक कद को कमजोर करने की कोशिश में हैं। देरी से जहां सत्ता और संगठन के बीच तालमेल पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं, वहीं कांग्रेस इस स्थिति को अपने पक्ष में करने की रणनीति बना रही है।यदि नियुक्तियों को लेकर स्थिति जल्द स्पष्ट नहीं हुई, तो इसका दूरगामी असर 2028 के विधानसभा चुनाव तक दिखाई दे सकता है। समीक्षकों का कहना है कि भाजपा सरकार की यही सुस्ती विपक्ष को दोबारा सत्ता तक पहुंचाने का रास्ता तैयार कर सकती है।यह सवाल अब भी अनुत्तरित है कि क्या मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अंतिम समय में कोई बड़ा राजनीतिक संतुलन साध रहे हैं या फिर यह देरी वास्तव में सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है?