तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ी अब सिरिफ हमन के बोली नई रहिस, बलकि राजभासा के दर्जा पा गे हे। ये हमर राज अऊ संस्कृति बर गर्व के बात हे। बछरां ले हमर मातृभाषा हमन ल पहिचान देथे, हमर संस्कृति, परंपरा अऊ लोकजीवन के रंग-रूप ल सम्हारे रखे हे। माटी के खुशबू, गांव-गली के ठेठ बोली, गीत, कविता, कहानी अऊ लोकसंगीत, ये सब्बो हमर छत्तीसगढ़ी बोली के अमूल्य खजाना आय।कई दशक तक छत्तीसगढ़ी बोलइया मन अपन खुद के परदेश म अपन मातृभाषा ल सम्मान नई दिला पाय रहिन। ये पीरा हर छत्तीसगढ़ी मन के मन म हमेशा अपनापे रहिस। फेर अब बखत बदल गे हे। हमर छत्तीसगढ़ी राजभाषा बन गे हे, अऊ ये ऐतिहासिक उपलधि हर हर एक छत्तीसगढ़ी मन म गर्व अऊ आत्मसम्मान के भाव भरे हे।ये गर्व सिरिफ प्रतीकात्मक नई हे। राजभाषा बनाय के बाद हमर छत्तीसगढ़ी अब शिक्षा, शासन-प्रशासन, सरकारी कामकाज अऊ साहित्यिक मंच म राष्ट्रीय स्तर तक पहिचान पाही। ये हमर संस्कृति ल मजबूत करही, नवा पीढ़ी ल अपन जड़ अऊ मातृभासा बर गर्व करइया बनाही, अऊ नई पीढ़ी ल छत्तीसगढ़ी के महत्व समझाय के अवसर देवाही।ये उपलधि म छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह अऊ पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक सहित पूरा जिम्मेदार मन के योगदान सराहनीय हे। राजनीति के पचड़ा ले ऊपर उठके मातृभासा बर करे गे ये प्रयास ह आज हमन ल ये गौरवशाली दिन देखाय हे।अब जिम्मेदारी हम सब्बो छत्तीसगढ़ी मन के हे ,अपन बोली ल अउ मजबूत बनाय बर। घर-गली, स्कूल-कॉलेज, साहित्य अऊ मीडिया ,हर जगह छत्तीसगढ़ी ल अपनावन अऊ गोठियावन। हमर बोली के सम्मान तब्बे बढ़ही जब हमन ये ल गर्व ले बोलबो अऊ नवा पीढ़ी ल घलो सिखाबो।मोर बोली, मोर अस्मिती ,अब राष्ट्रीय मंच म अपन जगह बना ले हे। हमर लोकगीत, कविता अऊ कहानी अब पूरा देस म अपन मधुरता अऊ मिठास बिखेर सकही। ये सिरिफ भाषा के सम्मान नई, बलकि हमर संस्कृति, परंपरा अऊ छत्तीसगढ़ी समाज के पहिचान के सम्मान घलो हे।अब बखत आ गे हे, राजनीति अऊ संकीर्ण सोच ले ऊपर उठे के। संग-संग चलन अऊ अपन मातृभाषा ल हर क्षेत्र म गर्व ले प्रस्तुत करन। छत्तीसगढ़ी अब सिरिफ बोली नई – ये गौरव, सम्मान अऊ राष्ट्रीय पहिचान बन गे हे।मोर छत्तीसगढ़ी, मोर मान ,अब राजभाषा बनके पूरा देस म अपन पहिचान पाय हे!