तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

बिलासपुर संभाग के अंतर्गत जांजगीर-चांपा जिले में नागरिक सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सिविल डिफेंस का विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर का नेतृत्व जिला सेनानी एवं जिला अग्निशमन अधिकारी नगर सेना योग्यता साहू ने किया। प्रशिक्षण के दौरान अधिनायकों और पंजीकृत प्रतिभागियों को न केवल सैद्धांतिक जानकारी दी गई, बल्कि व्यावहारिक तौर पर भी यह सिखाया गया कि आपात स्थिति में तुरंत किस प्रकार राहत एवं बचाव कार्य को अंजाम देना चाहिए।प्रशिक्षण में 12 प्रकार की सेवाओं का विस्तारपूर्वक विवरण दिया गया। इसमें हवाई हमले की स्थिति में नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर ले जाना, आग लगने पर त्वरित प्रतिक्रिया, प्राकृतिक आपदा के समय राहत कार्य, घायल व्यक्तियों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराना, भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, नागरिकों को जागरूक करना और आपदा के बाद पुनर्वास कार्य जैसे विषय शामिल थे। प्रशिक्षकों ने बताया कि सिविल डिफेंस केवल किसी विशेष बल का नाम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी सोच और तैयारी है जो आम नागरिक को भी समाज की सुरक्षा के लिए सक्षम बनाती है।इस प्रशिक्षण में कुल 331 महिला एवं पुरुष प्रतिभागी पंजीकृत हुए। इनमें युवाओं से लेकर गृहणियों और विभिन्न पेशों से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। जिला सेनानी योग्यता साहू ने कहा कि सिविल डिफेंस का प्रशिक्षण आम नागरिकों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आपदा की घड़ी में प्रशिक्षित नागरिक ही तुरंत सही निर्णय लेकर अपने आसपास के लोगों को सुरक्षित रख सकते हैं।इस शिविर में जिला सेनानी योग्यता साहू के साथ-साथ सहायक ग्रेड-तीन रुपाली गुप्ता, हवलदार विशंभर राठौर, नायक विवेकानंद गोस्वामी एवं अन्य कर्मचारियों की विशेष भूमिका रही। इन सभी ने मिलकर प्रतिभागियों को नागरिक सुरक्षा की महत्ता और होमगार्ड एवं फायर सर्विस के कर्तव्यों से परिचित कराया।प्रशिक्षण के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि नागरिक सुरक्षा केवल सरकारी अमले का दायित्व नहीं है, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह आपदा की स्थिति में सजग रहे और समाज के प्रति अपनी भूमिका निभाए। प्रशिक्षण में इस बात पर भी जोर दिया गया कि आधुनिक समय में सिविल डिफेंस केवल युद्ध या हवाई हमले तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं, आगजनी, औद्योगिक हादसों और प्राकृतिक आपदाओं में भी यह उतना ही जरूरी है। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने यह माना कि इस प्रकार का प्रशिक्षण उन्हें आत्मनिर्भर बनाता है और समाज की रक्षा के लिए उनका आत्मविश्वास बढ़ाता है। आयोजन को लेकर जिलेभर में सकारात्मक चर्चा रही और प्रतिभागियों ने उम्मीद जताई कि आगे भी ऐसे कार्यक्रम नियमित अंतराल पर आयोजित किए जाएंगे।


