ग्रामीण महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने की अभिनव पहल।

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तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

अगर हौसला हो तो हर सपना पूरा हो सकता है” यह बात अब जिले की ग्रामीण और विशेष संरक्षित जनजाति की महिलाएं साबित कर रही हैं।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना के तहत उन्हें ड्राइविंग प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने की एक बड़ी पहल की गई है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को नए कौशल से जोड़कर लखपति दीदी बनाना है। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को प्रशासन की ओर से ई रिक्शा और गार्बेज वाहन भी प्रदान किया गया है। गार्बेज वाहन से ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई कार्य आसानी से हो रहे है।

कलेक्टर संजय अग्रवाल और जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल के मार्गदर्शन में किया गया। स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान कोनी में जिलेभर से चयनित 35 महिलाओं को एक माह का गहन ड्राइविंग प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को जिला प्रशासन द्वारा ई रिक्शा और गार्बेज वाहन दिया गया है ताकि वे इस माध्यम से अपनी आजीविका में वृद्धि कर सकें। जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल ने बताया कि स्व-सहायता समूह की दीदियों को वाहन चलाना सिखाकर उन्हें एक नया कौशल दिया गया है। यह पहल उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और सम्मानजनक आजीविका अर्जित करने में मदद करेगी। यह प्रयोग पहली बार जिले में शुरू हुआ है और आगे भी इसे बढ़ाया जाएगा।

विशेष संरक्षित जनजाति की महिला अंजनी जगत ने कहा कि हमारे गांव में लोगों के लिए साइकिल चलाना ही बड़ी बात मानी जाती है। अब उसी गांव की महिला कार चला रही है, यह हमारेआत्मविश्वास की जीत है। मैं इस योजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करती हूं।

इसी तरह, विशेष संरक्षित जनजाति की कमला बैगा, ग्रामीण महिला शीतल, चंपा सोनी, दिव्यांग महिला कौशलिया सिदार और सुनिता भार्गव ने भी अपने अनुभव साझा किए। सभी ने माना कि बिहान योजना से जुड़कर उनके जीवन में बदलाव आया है। उन्हें गांव से बाहर आकर नया कौशल सीखने और भविष्य के लिए अवसर बनाने का मौका मिला है जिससे वे अपनी आजीविका बढ़ाने में सक्षम होंगी।

प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाएं कहती हैं कि यह पहल उनके जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आई है। ड्राइविंग जैसे कौशल से वे ट्रांसपोर्ट, स्कूल वैन, टैक्सी सेवा, पिकअप, गार्बेज वाहन संचालन जैसे कई कार्याें से जुड़ रही हैं। साथ ही सरकार द्वारा दिए गए ई रिक्शा और ई गार्बेज वाहन से उन्हें आर्थिक मजबूती का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि बिहान योजना के तहत जिले में इस समय 64 रोजगारमुखी गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। इनमें सिलाई-कढ़ाई, डेयरी, बकरी पालन, मशरूम उत्पादन, फूड प्रोसेसिंग, ब्यूटी पार्लर ट्रेनिंग, हस्तशिल्प निर्माण जैसे विविध कार्य शामिल हैं। अब ड्राइविंग प्रशिक्षण जोड़कर महिलाओं के लिए आजीविका के नए क्षेत्र की शुरूआत की गई है। समूह की महिलाओं को जिला प्रशासन द्वारा ई-रिक्शा और गार्बेज वाहन दिया गया है ताकि उनकी आजीविका में वृद्वि हो, ग्रामीण क्षेत्रों में गार्बेज वाहन से सफाई कार्य में तेजी आई है और स्वच्छता पखवाड़ा में इन वाहनों से साफ-सफाई का कार्य आसान हुआ है। अब तक ग्रामीण इलाकों की महिलाओं की भूमिका मुख्य रूप से घर और खेतीबाड़ी तक सीमित थी लेकिन इस अभिनव पहल से यह साबित हो गया है कि ग्रामीण महिलाएं अब केवल पारंपरिक कार्यों तक सीमित न रहकर नए क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना सकती हैं और ग्रामीण महिलाओं को अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती है। बिहान और “लखपति दीदी” योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला रही है।


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