रमन राज में छत्तीसगढ़ी बना राजभाषा, साय राज में राष्ट्रीय पहचान-सुबोध बनेंगे कड़ी। - Sarvavyapi रमन राज में छत्तीसगढ़ी बना राजभाषा, साय राज में राष्ट्रीय पहचान-सुबोध बनेंगे कड़ी। - Sarvavyapi

रमन राज में छत्तीसगढ़ी बना राजभाषा, साय राज में राष्ट्रीय पहचान-सुबोध बनेंगे कड़ी।

Share Now

कबीरधाम/चेतन साहू/ ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ की सियासत में अक्सर यह बहस चलती रही है कि राज्य की अपनी माटी की भाषा ‘छत्तीसगढ़ी’ को राष्ट्रीय स्तर पर क्यों वह पहचान नहीं मिल पाई जिसकी वह हकदार है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के लंबे कार्यकाल में जहां राजभाषा को संवैधानिक दायरे में सशक्त करने का प्रयास हुआ, वहीं अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कार्यकाल में इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाने की कवायद तेज़ होती दिख रही है।

इस सिलसिले में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह की भूमिका एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आ रही है।

रमन राज के दौरान छत्तीसगढ़ी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिलाना ऐतिहासिक कदम माना गया। भाषा आयोग के गठन, सरकारी कामकाज में प्रयोग और साहित्यिक आयोजनों को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस पहल हुई। यह नींव थी जिसने आने वाले समय में भाषा के लिए बड़े सपने देखने का अवसर दिया।

वही अब, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सामने चुनौती सिर्फ राजभाषा को संभालने की नहीं, बल्कि उसे राष्ट्रव्यापी पहचान दिलाने की है।

भाजपा संगठन ने नाम लगभग तय कर दिए हैं और राजभाषा आयोग में जल्द नियुक्ति की मुहर लगने की संभावना है। यह कदम सिर्फ भाषाई संवेदना का सम्मान नहीं बल्कि राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने का प्रयास होगा।

वहीं राजभाषा आयोग की अध्यक्षता पर नई बहस शुरू भी हो चुकी है और इस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह की निर्णायक भूमिका मानी जा रही है। छत्तीसगढ़ी भाषा को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयासों में अब तक उम्रदराज साहित्यकारों को ही छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की अध्यक्षता सौंपी जाती रही है।

अक्सर यह पद एक ही जाति विशेष तक सीमित कर दिया गया। लेकिन इस बार समीकरण बदलते दिख रहे हैं।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह से उम्मीद की जा रही है कि वे इस दिशा में निर्णायक पहल करेंगे। क्योंकि यह पद किसी राजनीतिक पार्टी का हिस्सा नहीं, बल्कि साहित्यकार और पत्रकारिता जगत से अध्यक्ष बनाए जाने का ही प्रावधान रखता है।

ऐसे में मांग उठ रही है कि मुख्यमंत्री से विशेष चर्चा कर सुबोध कुमार सिंह इस पर मुहर लगवाएं कि आयोग की कमान इस बार पत्रकारिता जगत से किसी युवा चेहरे को सौंपी जाए। यह कदम छत्तीसगढ़ी भाषा के संवर्धन को नई दिशा देगा और राष्ट्रीय पहचान दिलाने की राह आसान बनाएगा।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को इस बदलाव की कड़ी माना जा रहा है। वे न सिर्फ प्रशासनिक दक्षता रखते हैं, बल्कि भाषा और संस्कृति को नीति-निर्माण से जोड़ने की समझ भी रखते हैं।

विभागीय सूत्र बताते हैं कि उनकी पहल पर राजभाषा को राष्ट्रीय स्तर पर शामिल कराने की दिशा में मसौदा तैयार हो रहा है। यदि यह सफल होता है तो छत्तीसगढ़ का नाम उन चुनिंदा राज्यों में शुमार होगा जिन्होंने अपनी मातृभाषा को देशव्यापी मान्यता दिलाई।हालांकि सवाल भी उठ रहे है कि क्या यह पहल महज राजनीतिक अवसरवाद है या वास्तविक संकल्प?

आलोचकों का कहना है कि जब तक छत्तीसगढ़ी को शिक्षा, रोजगार और तकनीकी क्षेत्र में मजबूती से लागू नहीं किया जाता, तब तक राष्ट्रीय पहचान का सपना अधूरा रहेगा। दूसरी ओर समर्थक मानते हैं कि साय सरकार और सुबोध सिंह की जोड़ी इस दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।कुल मिलाकर, यह कहना गलत नहीं होगा कि रमन राज ने बीज बोए और साय राज उस फसल को राष्ट्रीय खेत में लहलहाने का प्रयास कर रहा है। और इस सफर की सबसे अहम कड़ी बनकर सामने आए हैं सुबोध कुमार सिंह, जिनसे छत्तीसगढ़ अब नई उम्मीदें जोड़कर बैठा है।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!