गौरेला-पेंड्रा-मरवाही/सीता बनाफर/ सर्वव्यापी/
जीपीएम जिले की मरवाही को मध्य प्रदेश की सीमा से जोड़ने वाले सड़कों का हाल देखकर यही लगता है कि शासन-प्रशासन ने इन रास्तों को यात्रियों के लिए “आधुनिक तपोवन” घोषित कर रखा है। लोक निर्माण विभाग और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना विभाग की उदासीनता ने इन मार्गों को सड़क कम और जलकुंड ज्यादा बना दिया है। लोग गड्ढों से भरे इस मार्ग पर गिर-गिरकर और चोट खाकर मानो किसी पुरानी तपस्या की साधना कर रहे हों, जबकि विभागीय अफसर ध्यान में ध्यान लगाए बैठे हैं,शायद किसी बड़े हादसे के ‘प्रबोधन’ की प्रतीक्षा में।मरवाही से भेड़वा नाला मार्गयह मार्ग सालों से अधिकारियों की आँख मिचौनी का शिकार है। सड़क पर गड्ढे तालाब का रूप ले चुके हैं, जिनमें ओवरलोडेड ट्रक आराम से ‘स्नान’ करते हुए निकलते हैं। दो पहिया और पैदल यात्री इस यात्रा को किसी दंड-व्रत की तरह निभा रहे हैं।धरहर से भेलमा मार्गइस मार्ग को देखकर लोग कहते हैं कि पाप धोने के लिए गंगा स्नान की जरूरत नहीं, इस रास्ते से गुजरना ही काफी है। बारिश में गड्ढे ऐसे तालाब बन जाते हैं कि चार पहिया वाहन आधे डूब जाते हैं। यहाँ से गुजरना किसी ‘प्रायश्चित यात्रा’ से कम नहीं।देवगवां–मालाडांड–चोलना मार्गप्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से बना यह मार्ग अब प्रधानमंत्री गड्ढा योजना” जैसा प्रतीत होता है। गूजर नाला का पुल दशकों से जर्जर है और पानी के नीचे गायब हो जाता है। राहगीर आँख बंद करके ‘श्रद्धा-भक्ति’ में पार करने की कोशिश करते हैं।चंगेरी से बगडुमरा मार्गयहाँ से बस और निजी वाहन चलाने वाले चालक अब ‘संत’ हो चुके हैं। हर यात्रा में धैर्य, संयम और साहस की परीक्षा देनी पड़ती है।विभाग का मौन साधनालोक निर्माण विभाग की कार्यपालन अभियंता नित्या ठाकुर का कहना है कि ऑफिस आऊंगी तो बताऊंगी, जबकि पीएमजीएसवाय के कार्यपालन अभियंता प्रयाग दीक्षित का कहना है कि ठेकेदार को लेटर और इमरजेंसी फंड का डिमांड सुनकर लगता है कि विभागीय समाधान भी ध्यान-योग की मुद्रा में ही है।


