विकास नंद/सर्वव्यापी/
जल संरक्षण के क्षेत्र में महासमुंद जिले ने एक और स्वर्णिम उपलब्धि हासिल की है। जल संचय जन भागीदारी अभियान 2.0 के अंतर्गत जिले ने जोन-2 की कैटेगरी-2 में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि के लिए भारत सरकार द्वारा जिला प्रशासन को एक करोड़ रुपए की नगद प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।यह सम्मान जिले द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए दिया गया है। जल संचय जनभागीदारी अभियान 2.0, जल शक्ति अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य वर्षा जल संचयन, भूजल स्तर में वृद्धि और जल संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना है।कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन और सतत मॉनिटरिंग से यह अभियान जन-आंदोलन का रूप ले सका। जिले में ‘मोर गांव-मोर पानी’ पहल को गति दी गई, जिसके तहत सोखता गड्ढा, इंटेकवेल रिचार्ज, रूफटॉप हार्वेस्टिंग और अन्य नवाचारों को अपनाकर जल संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की गई।जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता अजय खरे ने बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास, शिक्षा, नगरीय निकाय, राजस्व विभाग सहित विभिन्न शासकीय विभागों ने मिलकर इस अभियान को सफल बनाया। जिले में अब तक 35,182 जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिनसे वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण और भूजल पुनर्भरण संभव हुआ।‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत अब तक जनभागीदारी से 5,000 सोखता गड्ढों का निर्माण पूरा किया जा चुका है, साथ ही 125 इंजेक्शन वेल के माध्यम से भूमिगत जल का पुनर्भरण किया गया है। जनपद पंचायतों द्वारा कुल 1839 सोखपीट तैयार किए गए —महासमुंद में 269, बागबाहरा में 352, पिथौरा में 451, बसना में 282 और सरायपाली में 485।इसी तरह, 25 बोरवेल रिचार्ज किए गए हैं और 785 अन्य जल संरक्षण कार्य पूरे किए गए हैं। शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है।महासमुंद की यह उपलब्धि पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है और यह सिद्ध करती है कि जनसहभागिता के माध्यम से किसी भी अभियान को जन-आंदोलन का रूप दिया जा सकता है।


