विकास नंद /सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर के विवेकानंद सभागार में नव नियुक्त सिविल जज (कनिष्ठ वर्ग) हेतु आयोजित प्रारंभिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम चरण का समापन आज हुआ। यह तीन माह का प्रशिक्षण कार्यक्रम 30 जून 2025 से प्रारंभ हुआ था, जिसका उद्देश्य युवा न्यायाधीशों को न्यायिक कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल एवं दृष्टिकोण से सुसज्जित करना था।कार्यक्रम के समापन सत्र में मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय रमेश सिन्हा ने अपने मार्गदर्शनात्मक विचार साझा करते हुए कहा कि संवेदनशीलता और दृढ़ता का संतुलन ही एक सच्चे न्यायाधीश की पहचान है। उन्होंने कहा कि न्यायिक सेवा में कार्यरत प्रत्येक अधिकारी को संवैधानिक मूल्यों, निष्ठा और करुणा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने प्रशिक्षु न्यायाधीशों से कहा कि नागरिकों के लिए न्याय प्राप्ति का पहला संपर्क बिंदु प्रवेश स्तर के न्यायाधीश होते हैं, अतः न्यायाधीशों का शिष्टाचार, समयनिष्ठा और करुणा न्यायपालिका की छवि निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीश का पहनावा केवल वस्त्र नहीं, बल्कि समाज के विश्वास का प्रतीक है।उन्होंने सभी युवा न्यायाधीशों से आग्रह किया कि वे अपने पूरे कार्यकाल में विधि के विद्यार्थी बने रहें, क्योंकि विधि निरंतर परिवर्तनशील है। विनम्रता, नैतिकता और निष्पक्षता न्यायाधीशों के चरित्र का मूल आधार होना चाहिए।
इस अवसर पर न्यायमूर्ति रजनी दुबे, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी भी उपस्थित रहीं।प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत वैधानिक एवं प्रक्रिया संबंधी विधियों, न्यायालय प्रबंधन, तकनीकी उपयोग, नैतिकता, संवेदनशीलता तथा वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया। इस प्रशिक्षण के उपरांत सभी नव नियुक्त सिविल जज अपने पदस्थापनों पर नई ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ कार्यभार ग्रहण करेंगे।
समारोह में प्रभारी रजिस्ट्रार जनरल एवं उच्च न्यायालय के अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे। स्वागत उद्बोधन न्यायिक अकादमी के निदेशक द्वारा तथा आभार प्रदर्शन अतिरिक्त निदेशक द्वारा किया गया।


