गौरेला में चुनरी यात्रा का भव्य आयोजन, भक्तिभाव से गूंजा नगर। - Sarvavyapi गौरेला में चुनरी यात्रा का भव्य आयोजन, भक्तिभाव से गूंजा नगर। - Sarvavyapi

गौरेला में चुनरी यात्रा का भव्य आयोजन, भक्तिभाव से गूंजा नगर।

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नूर मोहम्मद /गौरेला पेंड्रा मरवाही/(सर्वव्यापी)

नगर में सर्व हिंदू सनातनी समाज के तत्वावधान में नवरात्रि के पावन पर्व पर चुनरी यात्रा का भव्य आयोजन किया गया। यह धार्मिक यात्रा गौरेला के राधा कृष्ण मंदिर से विधिवत प्रारंभ होकर कमानिया गेट तिराहा, मरही माता मंदिर, मंगली बाजार से होते हुए खेर माई माता मंदिर तक पहुंचीयात्रा मार्ग में जगह-जगह भक्तों ने माता रानी के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। साईं मंदिर प्रांगण में समिति के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं सैकड़ों श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पवर्षा कर चुनरी यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर मातृशक्ति की आराधना करते हुए भक्तजन नृत्य और भजनों के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त करते नजर आए।समिति सदस्यों ने बताया कि यह आयोजन सनातन संस्कृति की जीवंत परंपराओं को आगे बढ़ाने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का प्रतीक है। चुनरी यात्रा में महिलाओं, युवाओं और बच्चों की बड़ी संख्या में सहभागिता देखने को मिली। नगर भक्तिभाव और जय माता दी के गगनभेदी नारों से गुंजायमान रहा। भक्ति गीतों से गूंजा माहौल यात्रा के दौरान जगह-जगह भजन मंडलियों द्वारा माँ दुर्गा के भक्ति गीत प्रस्तुत किए गए। ढोल-नगाड़ों की धुन और भक्तिमय गीतों पर श्रद्धालु झूम उठे। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में माँ दुर्गा के गीत गाए और नृत्य करते हुए वातावरण को और भी भव्य बना दिया यात्रा में नगर के जनप्रतिनिधियों समाजसेवियों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। उन्होंने न केवल स्वयं भाग लिया, बल्कि आमजन से भी ऐसे आयोजनों में सक्रिय रूप से शामिल होने की अपील भी की। सभी ने एक स्वर में कहा कि ऐसे आयोजन समाज की एकता और सांस्कृतिक गौरव को और मजबूत बनाते हैं।गौरेला नगर की चुनरी यात्रा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सनातन संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी और सशक्त हैं। इस यात्रा ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट किया, बल्कि सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक गौरव का भी अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।भक्ति, उल्लास और उमंग से भरी इस चुनरी यात्रा ने नगरवासियों के हृदय में माँ दुर्गा की अटूट श्रद्धा का संचार किया। यात्रा की गूंज अभी भी नगरवासियों के मन-मस्तिष्क में बनी हुई है और आने वाले वर्षों में इसे और भव्य स्वरूप देने का संकल्प लिया गया है।


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