गाँधी पदयात्रा एवं गाँधीवाद पर चर्चा कार्यक्रम में सम्मिलित हुए जन्मजय। - Sarvavyapi गाँधी पदयात्रा एवं गाँधीवाद पर चर्चा कार्यक्रम में सम्मिलित हुए जन्मजय। - Sarvavyapi

गाँधी पदयात्रा एवं गाँधीवाद पर चर्चा कार्यक्रम में सम्मिलित हुए जन्मजय।

Share Now

विकास नंद /सर्वव्यापी/

सरायपाली/बसना – सन् 1945 से ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ तिरंगा झंडा लेकर आजादी का शंखनाद करने वाले आंचलिक पदयात्रा के प्रेरणा पं.जयदेव सतपथी एवं पुत्र लक्ष्मण सतपथी द्वारा संचालित 81 वीं वार्षिक गाँधी पदयात्रा युवा समाज सेवी विद्याभूषण सतपथी अपने सहयोगियों के साथ जनजागरण गाँधी पदयात्रा करते हुए द्वितीय दिवस रामचण्डी महाविद्यालय बगईजोर पहुँचे।महाविद्यालय में इस अवसर पर गांधीवाद पर चर्चा विषय पर कार्यक्रम आयोजित थी।

मुख्य अतिथि के रूप में समाज सेवी विद्याभूषण सतपथी उपस्थित थे।इस अवसर पर वंदेमातरम सेवा संस्थान छत्तीसगढ़ के उपाध्यक्ष एवं साहित्य साधक,प्रखर वक्ता जन्मजय नायक सम्मिलित हुए। नायक ने गांधीवाद पर अपना वक्तव्य देते हुए कहा आज के युग में जब दुनिया हिंसा,असमानताऔर अन्याय से जूझ रही है,ऐसे में गांधीवाद के सिद्धांत और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

गांधीवाद हमें सिखाता है कि कैसे व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर शांति,सद्भावना और समानता लाई जा सकती है।यह न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए प्रेरणा का स्रोत है,जो मानवता को एक बेहतर और न्यायपूर्ण समाज बनाने का मार्ग दिखाता है।नायक ने आगे कहा गांधीवाद केवल एक सिद्धांत नहीं बल्कि यह जीवन जीने की कला है।

गाँधी जी ने मेरा जीवन ही मेरा संदेश है का अपना आदर्श वाक्य दिया था,जो हमें उनके सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारने और सत्य व अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।नायक ने अंत में कहा गाँधी जी किसी ऊँचे टीले पर खड़े होकर केवल उपदेश भाषा नहीं कही,वे स्वयं यथार्थ के धरातल पर अपने संदेशों का परिपालन किया।

गाँधी जी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे,और सत्य तक पहुँचने के लिए अहिंसा को नितांत आवश्यक मानते थे।उनके अनुसार सत्य का लक्ष्य अपराधी को शर्मिंदा करना नहीं,बल्कि हृदय परिवर्तन लाना है तथा अहिंसा का उद्देश्य केवल दूसरों को चोट पहुँचाना ही नहीं,बल्कि दूसरों के प्रति असीम प्रेम है।नायक ने महाविद्यालय के छात्रों को महान व्यक्तियों के विचार और संदेशों को आत्मसात करते हुए सेवा क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।इसके लिए महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना को महत्वपूर्ण इकाई बताते हुए एक अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा दी।

नायक ने अंत में सतपथी परिवार के अनवरत चली आ रही इस पदयात्रा को जन-जन में चेतना और जागरूकता लाने का महत्वपूर्ण वअनुकरणीय कदम बताया।

इस अवसर पर तमाम बुद्धिजीवी वर्ग,प्रबुद्ध जन, साहित्यकार,समाजसेवी,शिक्षक शिक्षिकाएं एवं महाविद्यालय परिवार उपस्थित थे।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!