तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ा ‘व्रत’ इंतजार का है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जब तक अपने विधायकों और वरिष्ठ भाजपा नेताओं को संसदीय सचिव, निगम-मंडल-आयोग-बोर्ड, सहकारी बैंकों और नगरीय निकायों में एल्डरमेन पदों का प्रसाद नहीं परोसते, तब तक पार्टी के भीतर का असंतोष ‘उपवास’ की तरह गहराता ही जा रहा है।नवरात्रि का व्रत खत्म हो गया, लेकिन नियुक्तियों का ‘घंटा’ अब तक नहीं बजा। इस बार चर्चा थी कि क्वांर नवरात्रि में बड़ी घोषणा होगी, पर आज नवमी के बाद भी आदेश की एक परची तक जारी नहीं हुई। दावेदारी करने वाले भाजपा के नेता और विधायक अब अपनी ही सरकार को ‘ठोस’ और ‘मौन’ कहकर तंज कसने लगे हैं।पार्टी सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं अभी तक अपने सलाहकारों की नियुक्ति भी नहीं कर पाए हैं। ऐसे में कार्यकर्ताओं और दावेदारों की फौज सवाल कर रही है कि अगर मुख्यमंत्री को खुद का सलाहकार चुनने में इतना वक्त लग रहा है, तो बड़े पैमाने की राजनीतिक नियुक्तियों का क्या होगा?इधर, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष किरण सिंह देव और संगठन महामंत्री पवन साय भी दावेदारों को सिर्फ धैर्य रखने की नसीहत देते दिखते हैं, जबकि जमीनी कार्यकर्ता पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक संगठन और नेतृत्व केवल ‘आश्वासन’ के सहारे पार्टी का मनोबल बनाए रखेंगे।राजधानी रायपुर से लेकर जिलों तक भाजपा खेमे में यह फुसफुसाहट तेज हो गई है कि कहीं यह इंतजार लंबा चुनावी संकट न बन जाए। क्योंकि जिन दावेदारों ने चुनाव में खून-पसीना बहाया, उन्हें अब तक ‘प्रसाद’ का एक कण तक नसीब नहीं हुआ है।नेताओं के बीच व्यंग्य में कहा जा रहा है कि नवरात्रि तो खत्म हो गई, अब शायद दीवाली के पटाखों संग ही नियुक्तियों की आतिशबाज़ी होगी। तब तक भाजपा के दावेदार ‘प्रतीक्षा साधना’ में ही लीन रहें।


