विकास नंद/ सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक कदम उठाते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज राज्य के दौरे पर पहुंचे। उनका यह दौरा ऐतिहासिक और अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूर्णतः खात्मा कर दिया जाएगा।
भारत के इतिहास में लगभग 50 वर्षों से नक्सलवाद की आग में झुलसते छत्तीसगढ़ के लिए यह घोषणा एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब वह समय दूर नहीं जब बस्तर और आसपास के नक्सल प्रभावित क्षेत्र विकास और शांति के प्रतीक बनेंगे।
🔹 दौरे का कार्यक्रम
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज दोपहर छत्तीसगढ़ पहुंचे। रायपुर एयरपोर्ट से वे सीधे नया रायपुर स्थित मे-फेयर लेक रिज़ॉर्ट पहुंचे, जहां वे रात्रि विश्राम करेंगे।कल वे जगदलपुर जाएंगे, जहाँ सबसे पहले माँ दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद वे विश्व प्रसिद्ध बस्तर मेला में आयोजित मुरिया दरबार में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम सिरहासार भवन सिविल लाइन में आयोजित किया गया है।
मुरिया दरबार में वे जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा करेंगे।इसके बाद शाह लालबाग में आयोजित एक मंचीय कार्यक्रम में भाग लेंगे, जहाँ वे राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण घोषणाएँ कर सकते हैं। दोपहर भोज के बाद वे लगभग दोपहर 3 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
🔹 नक्सलवाद के अंत की नई रणनीति
गृहमंत्री शाह ने अपने संबोधन में कहा कि अब नक्सलवाद की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एक एकीकृत रणनीति पर काम कर रहे हैं। सुरक्षा बलों की तैनाती, आधुनिक उपकरणों का उपयोग, खुफिया तंत्र की मजबूती और विकास योजनाओं के माध्यम से नक्सल प्रभावित इलाकों में तेजी से बदलाव लाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में “विकास और विश्वास” के मंत्र के साथ नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम लड़ाई लड़ी जा रही है।
🔹 स्थानीय लोगों में उत्साह
केंद्रीय गृहमंत्री के इस दौरे को लेकर बस्तर और आस-पास के क्षेत्रों में लोगों में गजब का उत्साह है। मुरिया दरबार में हजारों की संख्या में स्थानीय लोग और पारंपरिक नर्तक-कलाकार शामिल होंगे। जनजातीय समाज को विश्वास है कि अमित शाह की इस घोषणा से बस्तर में स्थायी शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।


