तरुण कौशिक/ संपादक/
रेन सिन कान कराटे छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में बिलासपुर के अभिलाषा परिसर स्थित सामुदायिक भवन में आयोजित राज्य स्तरीय रेफरी सेमिनार एवं कराटे बेल्ट ग्रेडिंग परीक्षा में प्रदेश के विविध जिलों से आए प्रशिक्षकों एवं खिलाड़ियों ने अद्भुत उत्साह के साथ सहभागिता की। इस आयोजन में मुंगेली जिला ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया, जिससे क्षेत्रवासियों में अपार हर्ष व्याप्त है।मुंगेली जिला कराटे संघ के अध्यक्ष एवं मुख्य प्रशिक्षक बहोरन वर्मा ने जानकारी दी कि इस आयोजन में खिलाड़ियों ने अनुशासन, दक्षता और आत्मविश्वास का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि यह परीक्षा केवल बेल्ट ग्रेडिंग नहीं, बल्कि चरित्र, साहस और आत्मसंयम की परीक्षा भी है।यह पूरा कार्यक्रम प्रदेश अध्यक्ष रमाकांत एस. मिश्र के नेतृत्व में गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। मिश्र ने कराटे को जीवन-शैली के रूप में अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि शारीरिक बल के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता ही व्यक्ति को संपूर्ण योद्धा बनाती है।इस अवसर पर मुंगेली जिले के सिलदहा डोजो के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का जब ग्राम आगमन हुआ, तो ग्राम पंचायत सिलदहा की सरपंच लता मनीष वर्मा ने खिलाड़ियों का सम्मान कर उनके उत्साह को नई ऊँचाइयाँ दीं। उन्होंने अपने प्रेरणास्पद संबोधन में कहा कि विपरीत परिस्थितियों से जूझने के लिए सही निर्णय और सही प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं। आज के समय में आत्मनिर्भरता और आत्मरक्षा का ज्ञान प्रत्येक बालिका और महिला के लिए अनिवार्य है। कराटे जैसे विधाओं के माध्यम से यह शिक्षा सहज ही संभव होती है।सम्मानित खिलाड़ियों में चंद्रदेव, समर, अभिषेक, देवराज, महेश्वरी, पियुष, नीलकंठ, यशस्वी, ईषा, कनक, गुंजन, दिव्यानी, शौर्य, वंशिका, शार्वी, रेणुका, बीना, अर्चना, जानकी, ज्योति, दीपांजलि सहित अनेक प्रतिभागी सम्मिलित रहे। इनके साथ प्रशिक्षक राहुल वर्मा एवं शिवम वर्मा भी उपस्थित रहे।ग्रामवासियों एवं अभिभावकों की बड़ी संख्या ने खिलाड़ियों के इस अभिनंदन समारोह में भाग लिया और युवा प्रतिभाओं के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएँ व्यक्त कीं।इस पूरे आयोजन ने न केवल मुंगेली जिले का गौरव बढ़ाया, बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य में नैतिक अनुशासन, खेल-संवर्धन और नारी सशक्तिकरण की एक नई परंपरा का सूत्रपात भी किया है।इस प्रकार के आयोजन केवल खेलकूद तक सीमित नहीं रहते; वे समाज में साहस, अनुशासन और आत्मविश्वास के बीज बोते हैं। “रेन सिन कान कराटे छत्तीसगढ़” जैसे संस्थानों का प्रयास आज के युवाओं को शारीरिक सशक्तिकरण के साथ मानसिक संतुलन की दिशा में अग्रसर कर रहा है, यही किसी भी सच्चे खेल-आंदोलन की आत्मा है।


