संपादक के कलम से...हमर छत्तीसगढ़ी भाषा ल कब मिलही पहिचान... - Sarvavyapi संपादक के कलम से...हमर छत्तीसगढ़ी भाषा ल कब मिलही पहिचान... - Sarvavyapi

संपादक के कलम से…हमर छत्तीसगढ़ी भाषा ल कब मिलही पहिचान…

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तरुण कौशिक/ संपादक/

01 नवम्बर 2000 ये दिन छत्तीसगढ़िया मन बर सिरिफ तारीख नई, गऊरव अऊ अपन अस्मिता के प्रतीक आय। बरसों तक अलग राज्य के मांग, आंदोलन, प्रदर्शन अऊ संघर्ष के बाद आखिर भारत के मानचित्र मं नवा राज्य बने छत्तीसगढ़। देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ह अपन वादा निभावत छत्तीसगढ़ ला अलग राज्य बनाय रहिन। ये निर्णय ह लाखों छत्तीसगढ़िया मन के सपना पूरा करिस।हमर छत्तीसगढ़ राज्य ल 25 बरस बीत गे हवे रजत जयंती मनावत हन, फेर सवाल आज वहीच हे के हमर छत्तीसगढ़ बने रहिस अपन संस्कृति, अपन बोली, अपन पहचान बर, फेर आज 2025 मं ये पूछे के जरूरत काबर पड़त हे कि छत्तीसगढ़ी भाषा आज तक सरकारी कामकाज के भाषा काबर नइ बन पाई?छत्तीसगढ़ी सिरिफ एक बोली नई, ये ह हमर आत्मा अऊ अस्मिता के आवाज आय। हमर गीत-नाचा, पहर-ओढ़ा, खेत-खार, पूजा-पाठ, देवी-देवता सब मं छत्तीसगढ़ी रचि-बसी हे। ये भाषा ह अपन मं अपन संस्कृति, सादगी अऊ गऊरव समेटे हे। फेर सरकार अऊ व्यवस्था अजिहां तक अपन घर के भाषा ला “आधिकारिक” माने मं हिचकिचावत हें।बीते 25 बरस मं कई झिन सरकार बदलिन, भाषाई नीति के चर्चा होई, प्रस्ताव बने, आयोग गठित होइस, पर नतीजा कागज ले बाहर नइ निकलिस। सरकारी आदेश, विभागीय काम, योजना-पत्र अऊ शासन-प्रशासन के पूरा ढांचा आजो हिंदी अऊ अंग्रेजी मं चलत हे। ये हालत देखके मन मं सवाल उठथे। जे राज्य अपन भाषा के मान नई रख सकय, वो दूसर विकास के दावा कैसे कर सकथे?छत्तीसगढ़ के गांव-गांव मं जिहां छत्तीसगढ़ी के बोल गूंजथे, उहें के दफ्तर मं ओकर जगह खाली हे। सरकारी कर्मचारी मन ला आजो छत्तीसगढ़ी मं आवेदन लिखे जाय त समझे मं कठिनाई लगथे। ये सिरिफ भाषा के अनदेखी नई, ये ह अपन पहचान के धीरे-धीरे मिटाय जाय के प्रक्रिया हे।हमर राज्य निर्माता अटल बिहारी वाजपेयी जी के नाम पर सहर-सहर मं “अटल परिसर” बनाय जावत हे, मूर्ति स्थापित होवत हे, ये गजब काम हे, पर सच्चा सम्मान तब होही जब अटल जी के नीति अऊ दृष्टिकोण के पालन होही। अटल जी ह राज्य निर्माण के संग-साथ “संस्कृति के सम्मान” के बात करे रहिन। आज भाजपा सरकार मं अटल जी के नाम त हवय, पर उनकर विचार अऊ योगदान के चर्चा सरकारी पाठ्यक्रम, नीति अऊ प्रशासन मं नई दिखत।छत्तीसगढ़ के ये 25 बरस मं विकास के कई पड़ाव पार होइस। सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग मं सुधार दिखत हे। नवा जिला बने, नवा विश्वविद्यालय खुले, बस्तर अऊ सरगुजा के इलाका तक सड़क पहुँच गे। फेर ये सब विकास के बीच हमर छत्तीसगढ़ी भाषा, हमर संस्कृति धीरे-धीरे हाशिए मं ढकलात जावत हे। भाषा ह सिरिफ संचार के साधन नई, ये ह पहचान के दस्तावेज आय।जऊन दिन छत्तीसगढ़ी भाषा सरकारी दफ्तर मं आदेश बने, नीति बने, शिक्षा मं माध्यम बने ,वो दिन छत्तीसगढ़ के असली आजादी के दिन कहे जाही।अब रजत जयंती के अवसर मं सरकार अऊ समाज दुनों ला सोचे के जरूरत हे। क्या हमन सिरिफ विकास के आंकड़ा गिनत रहिबो, या अपन संस्कृति अऊ भाषा के मान बर भी कुछ करबो? छत्तीसगढ़ के किसान, मजदूर, विद्यार्थी, लेखक, पत्रकार सबके जुबान छत्तीसगढ़ी आय।फेर शासन के जुबान छत्तीसगढ़ी कब बनही? अब समय आय कि छत्तीसगढ़ी भाषा ला संवैधानिक दर्जा, शासनिक मान्यता, अऊ राष्ट्रीय पहचान मिलही। अटल जी ला सच्चा श्रद्धांजलि तब्बै होही,जब छत्तीसगढ़ी भाषा सरकारी मंच के आवाज बनही अऊ “जय जोहार” सिरिफ अभिवादन नई, बल्कि गर्व के उद्घोष बन जाही।जय जोहार छत्तीसगढ़-जय छत्तीसगढ़ी भाखा….!!


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