विकास नंद/सर्वव्यापी/

महासमुंद जिले के पिथौरा विकास खंड जल संसाधन विभाग में पदस्थ उपसंभागीय अधिकारी लीलाधर रायकवार पर फर्जी अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र के आधार पर शासकीय सेवा प्राप्त करने और पदोन्नति का लाभ उठाने का आरोप लगा है।
इस संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग, रायपुर को गेवेन्द्र काले ने शिकायत आवेदन प्रस्तुत किया गया है, जिसमें पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।

मिली जानकारी के अनुसार, लीलाधर रायकवार वर्ष 1994 में मध्यप्रदेश तृतीय श्रेणी तकनीकी कार्यपालिक सेवा में अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थी के रूप में नियुक्त हुए थे। वर्ष 2023 में उन्हें सहायक अभियंता (नागरिक) पद पर पदोन्नति भी अनुसूचित जनजाति (ST) के आधार पर दी गई। जबकि दस्तावेजों के अनुसार रायकवार की वास्तविक जाति मध्यप्रदेश राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अंतर्गत आती है।
गौरतलब है कि रायकवार मूल रूप से मध्यप्रदेश के निवासी हैं, जहां उनकी जाति अनुसूचित जनजाति में नहीं आती बल्कि OBC वर्ग में दर्ज है।
इस तथ्य के बावजूद उन्होंने छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर शासकीय सेवा और पदोन्नति का लाभ प्राप्त किया।
इस प्रकरण को लेकर कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन विभाग महासमुंद द्वारा लीलाधर रायकवार को आवश्यक दस्तावेज जमा करने के संबंध में नोटिस जारी किया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा आयोग को भेजे गए आवेदन में मांग की गई है कि —
1. लीलाधर रायकवार के जाति प्रमाणपत्र की जांच उच्च स्तरीय समिति से कराई जाए।
2. यदि प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है, तो उनके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (कूट-रचना) और 471 (कूट-रचित दस्तावेजों का उपयोग) के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
3. छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आवरण) नियम 1965 और अनुशासनात्मक कार्यवाही अधिनियम 1989 के अंतर्गत विभागीय कार्रवाई कर सेवा से पृथक किया जाए।
4. भविष्य में इस प्रकार की फर्जी जाति प्रमाणपत्र की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु सभी विभागों में जाति प्रमाणपत्र सत्यापन की प्रक्रिया को सख्ती से लागू किया जाए।
शिकायत में कहा गया है कि यह मामला शासन की पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों से जुड़ा है, अतः इसमें शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इस संबंध में प्रतिलिपि सचिव जल संसाधन विभाग नवा रायपुर, मुख्य अभियंता महानदी गोदावरी कछार, अधीक्षण अभियंता भू-जल सर्वेक्षण मंडल रायपुर और कार्यपालन अभियंता जल संसाधन विभाग महासमुंद को भी भेजी गई है ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।


