संपादक के कलम से..अटल सपना के सुराज-रजत जयंती के छत्तीसगढ़। - Sarvavyapi संपादक के कलम से..अटल सपना के सुराज-रजत जयंती के छत्तीसगढ़। - Sarvavyapi

संपादक के कलम से..अटल सपना के सुराज-रजत जयंती के छत्तीसगढ़।

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तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

आज के दिन हमर मन गर्व अऊ गदगद ले भर जाथे। काबर आजेच के दिन वो सपना साकार होइस, जऊन सपना ला देखे रहिन भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री, राज्य निर्माता अटल बिहारी वाजपेयी जी। छत्तीसगढ़ के अलग अस्मिता, अपन संस्कृति, अपन बोली अऊ अपन गौरव के चिन्ह ला देश के नक्शा म उकेर दे के जे महान काम अटल जी करिन, वो दिन ला आज पूरा छत्तीसगढ़िया जनमानस श्रद्धा अऊ कृतज्ञता ले याद करथे।25 बछर होगे, छत्तीसगढ़ अब बालक नइ, जवान राज्य बन गे हवय। ये 25 बछर के यात्रा संघर्ष, समर्पण अऊ सफलता के कथा कहिथे। अटल जी के दूरदर्शिता अऊ छत्तीसगढ़ महतारी के आशीर्वाद के संग, हमर राज्य गांव-गांव म शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य, अन्नदाता अऊ आदिवासी भाई-बहिनी मन के उत्थान म नवा पहिचान बना ले हवय।आज जब हम रजत जयंती के अवसर म अपन प्रदेश के ओर देखथन, त लगथे—सच म अटल सपना के छाया म सुराज के पौधा अब हरियर होवत हवय।प्रदेश के राजधानी ले लइके पहाड़ी, मैदानी अऊ बस्तर-सुरगुजा के अंचल तक विकास के लहर पहुंचत हवय। छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान के जोत अब घर-घर म जलत हवय।पर ये अवसर सिरिफ जश्न मनाय के नइ, अपन जिम्मेदारी के स्मरण कराय के घड़ी ह घलो आय। अटल जी के सपना के “सुराज” तबे साकार होही जब शासन अऊ जनता म भरोसा, पारदर्शिता अऊ सेवा भाव रहिही। जब गांव म किसान मुस्कुराही, जब नवजवान मन अपन मेहनत म गर्व महसूस करही, जब महतारी मन के आंख म सुरक्षा अऊ सम्मान के चमक रहिही — तभे कहे जा सकही कि हमर छत्तीसगढ़ सच म अटल सपना के धरती बनिस।आज फेर एक बेर कहे बर मन चाहथें-“जय छत्तीसगढ़ महतारी, जय अटल विचार।”चलो, रजत जयंती के ये पावन अवसर म हम सब मिलके ये प्रण लेथन –“अटल जी के सपना के छत्तीसगढ़ ला सच्चे मायने म सुराज के धरती बनाबो…”


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