विकास नंद/सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ राज्य अपनी स्थापना के गौरवशाली 25 वर्ष पूरे करने जा रहा है।
रजत जयंती वर्ष के इस ऐतिहासिक अवसर पर जनता पूरे गर्व और आत्मीयता के साथ राज्य निर्माण के नायकों—पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी और छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी को स्मरण कर रही है। परंतु इन दोनों विभूतियों को याद करने में राजनीतिक दलों की चुप्पी जनता के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 2000 में अपने ऐतिहासिक निर्णय से छत्तीसगढ़ राज्य का गठन कर करोड़ों लोगों के सपनों को साकार किया। उन्होंने न केवल राज्य का निर्माण किया, बल्कि इसके लिए प्रारंभिक संरचना, संस्थागत व्यवस्था और विकास की दिशा भी सुनिश्चित की। वाजपेयी जी के निर्णय ने छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान दी — “संपन्नता की ओर अग्रसर नया राज्य”।
वहीं, छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी ने राज्य की नींव को मजबूत करने का कार्य किया। उन्होंने प्रत्येक विभाग में नये सिरे से कार्य व्यवस्था शुरू की और विकास की एक मजबूत रूपरेखा तैयार की।उनके कार्यकाल में—किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था लागू हुई,ग्रामीण अंचलों तक बिजली और सड़कों का विस्तार हुआ,शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और उद्योग के क्षेत्र में नई नीतियां बनीं।
इन दोनों दूरदर्शी नेताओं के प्रयासों से ही छत्तीसगढ़ ने पिछले 25 वर्षों में विकास की नई ऊंचाइयां हासिल की हैं।
आज जब प्रदेश रजत जयंती वर्षगांठ मना रहा है, तब जनता इन दोनों महान विभूतियों के योगदान को नमन कर रही है।परंतु यह भी एक कड़वा सच है कि राजनीतिक मंचों और आयोजनों में इन नेताओं का नाम तक नहीं लिया जा रहा, जिससे आमजन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या राजनीतिक स्मृतियां इतनी क्षणभंगुर हो गई हैं कि जिन्होंने राज्य बनाया और संवारा, उन्हें भुला दिया जाए
?छत्तीसगढ़ की रजत जयंती अवसर पर यह स्मरण आवश्यक है कि राज्य की असली ताकत उसकी जनता और वे नायक हैं जिन्होंने इसकी नींव ईमानदारी, दूरदर्शिता और विकास के संकल्प से रखी।
रजत जयंती वर्ष में यही संकल्प—विकास की राह पर एकजुट छत्तीसगढ़,अपने नायकों के योगदान को याद करता छत्तीसगढ़।


