तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आज हुई मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक उस समय तनातनी का केंद्र बन गई, जब किसानों के मुद्दे पर कैबिनेट के भीतर ही तीखा विरोध सामने आ गया। सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने प्रस्तावित किसान हितैषी फैसले पर खुलकर आपत्ति जताई, जिससे बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया। सूत्र बताते हैं कि यदि स्थिति ऐसे ही बनी रहती, तो किसानों से जुड़े किसी बड़े फैसले की घोषणा आज संभव ही नहीं थी।बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री स्वयं असमंजस की स्थिति में थे, लेकिन मुख्य सचिव विकास शील ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए स्पष्ट राय रखी कि किसानों के हित में त्वरित और साहसिक निर्णय आवश्यक है। विकास शील की दृढ़ता और तथ्यों पर आधारित प्रस्तुति के बाद मुख्यमंत्री ने अंतिम निर्णय किसानों के पक्ष में लिया। प्रशासनिक स्तर पर यह भूमिका बेहद निर्णायक साबित हुई।बैठक में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि भाजपा सरकार में शामिल अधिवक्ता पृष्ठभूमि वाले मंत्री और कुछ आईएएस से राजनीति में आए मंत्री जहां निजी हितों को तरजीह देते दिखे, वहीं कांग्रेस से भाजपा में आए एक विधायक—जो वर्तमान में मंत्री हैं—ने न केवल किसानों के हित में सरकार का पक्ष मजबूत किया, बल्कि मुख्य सचिव के तर्कों का खुलकर समर्थन भी किया।करीबी सूत्रों का कहना है कि यदि इस मंत्री का समर्थन और मुख्य सचिव विकास शील की निर्णायक सलाह न होती, तो आज किसानों के हित में हुआ बड़ा निर्णय टल जाता। राजनीतिक गलियारों में अब चर्चा है कि मंत्रिमंडल के भीतर बैठे कुछ नेता सरकार की नैया मज़बूत करने की बजाय डुबाने में लगे हैं, और यदि यह स्थिति जारी रही तो आगामी चुनाव में इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय अब किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, लेकिन कैबिनेट के भीतर का यह टकराव भाजपा सरकार के भीतर बढ़ते अंतर्विरोधों की ओर भी गंभीर संकेत देता है।


