तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ के कृषि विभाग में वर्षों से चले आ रहे कथित घोटालों का जाल अब खुलकर सामने आने लगा है। किसानों के नाम पर चलाई जा रही योजनाएँ ज़मीन पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं, जबकि फाइलों और कागज़ों में किसानों को पूरा लाभ मिलने का दावा किया जा रहा है।बीज, खाद, कृषि यंत्र, अनुदान और तकनीकी सहायता जैसी योजनाओं में भारी अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। कई मामलों में ऐसे किसानों के नाम पर भुगतान दर्शाया गया है, जिन्होंने न तो कभी आवेदन किया और न ही किसी योजना का लाभ लिया। वहीं, वास्तविक जरूरतमंद किसान आज भी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।सूत्रों के अनुसार, विभागीय मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी राशि का बंदरबांट किया जा रहा है। दलालों और कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की सांठगांठ से योजनाएँ किसानों तक पहुँचने के बजाय कागजी रिपोर्टों में सिमटकर रह गई हैं।ग्रामीण अंचलों के किसानों का कहना है कि हर साल नई योजनाओं की घोषणा तो होती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में न तो समय पर खाद मिलती है, न बीज और न ही अनुदान की राशि। परिणामस्वरूप किसान कर्ज में डूबता जा रहा है, जबकि कृषि विभाग अपनी पीठ खुद थपथपाने में लगा है।अब सवाल यह उठता है कि क्या इस काले साम्राज्य पर कभी गाज गिरेगी? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर किसान यूँ ही कागज़ों में लाभ पाता रहेगा और खेतों में संघर्ष करता रहेगा?राज्य सरकार और संबंधित निगरानी एजेंसियों से किसान संगठनों ने निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि कृषि योजनाओं का वास्तविक लाभ सही किसानों तक पहुँच सके और विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके।