विकास नंद/सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद की। फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम एसडीएम (राजस्व) अनुपमा आनंद को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र निराकरण की मांग की।फेडरेशन ने बताया कि पूर्व में भी विभिन्न चरणों के आंदोलनों के माध्यम से शासन-प्रशासन को 11 सूत्रीय मांगों से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी कड़ी में चतुर्थ चरण के आंदोलन के तहत यह ज्ञापन सौंपा गया।ज्ञापन में प्रमुख मांगों में जुलाई 2016 से लंबित महंगाई भत्ता (डीए) एरियर्स की राशि को जीपीएफ खाते में समायोजित करने, 8, 16, 24 और 32 वर्ष में समयमान वेतनमान लागू करने, अर्जित अवकाश नगदीकरण 300 दिवस करने तथा विभिन्न विभागों की वेतन विसंगतियों को दूर करने जैसी मांगें शामिल हैं। इसके अलावा शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा लाभ देने, अनुकंपा नियुक्ति पर लगी 10% सीमा समाप्त करने, पंचायत सचिवों का शासकीयकरण, सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने और संविदा व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए।फेडरेशन ने आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली बंद करने और सेवानिवृत्ति के बाद संविदा नियुक्तियों पर रोक लगाने के साथ ही रिक्त पदों पर जल्द भर्ती की मांग भी रखी है।इस दौरान अनिल पटेल, भोलानाथ नायक, जयंत बारीक, राजेश प्रधान, गणेश चौहान, उपेंद्र साहू, रोशन भोई, अंगद बारिक, लिंगराज देवांगन, जितेंद्र कुमार साहू, चंद्रशेखर पटेल, दमयंती नायक, दुर्वादल दीप, लोकेश पात्र सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं अधिकारी उपस्थित रहे।