तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म धुरंधर 2 इन दिनों अपने कंटेंट को लेकर जबरदस्त विवादों में घिर गई है। फिल्म में उपयोग की गई अश्लील गालियों और आपत्तिजनक संवादों ने दर्शकों को असहज कर दिया है। खासकर महिला दर्शकों ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे परिवार के साथ देखने लायक फिल्म नहीं बताया है।सिनेमाघरों में फिल्म देखने पहुंचे कई दर्शकों ने बताया कि फिल्म के दौरान बार-बार ऐसे संवाद सुनने को मिले, जिनसे उन्हें शर्मिंदगी महसूस हुई। कई परिवार बीच में ही फिल्म छोड़कर बाहर निकलते नजर आए। महिलाओं का कहना है कि मनोरंजन के नाम पर इस तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग पूरी तरह अनुचित है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है।फिल्म समीक्षकों का भी मानना है कि कमजोर कहानी को छिपाने के लिए अश्लीलता का सहारा लेना सिनेमा की गुणवत्ता को गिराता है। उनका कहना है कि फिल्म निर्माताओं को दर्शकों की भावनाओं और सामाजिक जिम्मेदारी का ध्यान रखना चाहिए, न कि सस्ते संवादों के जरिए सनसनी फैलाने की कोशिश करनी चाहिए।इस मामले में सेंसर बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। दर्शकों का कहना है कि आखिर किस आधार पर इस तरह की भाषा को अनुमति दी गई और क्या फिल्मों के लिए कोई स्पष्ट भाषा मानक नहीं हैं।सोशल मीडिया पर भी फिल्म के खिलाफ गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। लोग लगातार अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए फिल्म के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए फिल्म से आपत्तिजनक हिस्सों को हटाने की मांग की है।फिलहाल, धुरंधर 2 को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मनोरंजन के नाम पर किसी भी हद तक जाया जा सकता है, या फिर सिनेमा को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।