किरंदुल नगरपालिका में अस्थाई दखल शुल्क को ,डिजिटल e-Toll सिस्टम किया जाये-विवादों,भ्रष्टाचार से मुक्ति।

Share Now

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल नगरपालिका की अस्थाई दखल शुल्क (टोल) निविदा 2026-27 एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। छत्तीसगढ़ सरकार को तत्काल हस्तक्षेप की आवशयकता। पिछले कई वर्षों से यह निविदा लगातार भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और बार-बार तारीख बदलने-निरस्त करने जैसे घोटालों से घिरी हुई है।“भले ही बोली 14 लाख 20 हजार रुपये तक पहुंच गई हो, लेकिन अगर वसूली की पुरानी मनमानी प्रक्रिया जारी रही तो विवाद और भ्रष्टाचार थमने वाला नहीं है।” किरंदुल जैसे छोटे कस्बे में भी ट्रक-भारी वाहनों से ली जाने वाली अस्थाई दखल शुल्क की वसूली पूरी तरह से अपारदर्शी रही है, जिसके चलते मुख्य अधिकारी पर आरोप लगते रहे हैं और नगरपालिका की छवि खराब होती रही है।समय डिजिटल इंडिया का मॉडल अपनाने की मांग करता है ,सरकार से “न्यू छत्तीसगढ़” बनाने की दिशा में तुरंत कार्रवाई की अपील करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को पूरे राज्य की नगरपालिकाओं में अस्थाई दखल शुल्क को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने का प्रस्ताव है। निम्न प्रकिया लागू किया जा सकता है , डिजिटल पर्ची मशीन / e-Toll सिस्टम – बस टिकट मशीन की तरह रियल-टाइम प्रिंटिंग वाली आधिकारिक मशीन लगाई जाए, जिसमें हर ट्रांजेक्शन का डिजिटल रिकॉर्ड बने। QR Code आधारित भुगतान – हर चेकपॉइंट पर नगरपालिका का आधिकारिक बैंक QR Code प्रदर्शित किया जाए ताकि ड्राइवर सीधे UPI से भुगतान कर सकें। POS मशीन एवं कार्ड स्वाइप – प्रत्येक पॉइंट पर POS मशीन लगाई जाए ताकि डेबिट-क्रेडिट या UPI से भुगतान संभव हो। कैश पर भी डिजिटल रसीद – कैश देने पर भी मशीन से ही ट्रांजेक्शन आईडी, समय और वाहन नंबर वाली आधिकारिक रसीद प्रिंट हो। मोबाइल ऐप आधारित ऑनलाइन सिस्टम – राज्य स्तर का ऐप बनाया जाए जिसमें ट्रक मालिक पहले से ही शुल्क जमा कर ई-रसीद प्राप्त कर सकें। केंद्रीय डैशबोर्ड – सभी वसूली का रियल-टाइम डेटा मुख्य अधिकारी, कलेक्टर, विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय के डैशबोर्ड पर उपलब्ध हो। हर महीने सार्वजनिक वेबसाइट पर रिपोर्ट प्रकाशित की जाए।इससे अपेक्षित लाभ यह होगा की , इन कदमों से भ्रष्टाचार पर पूर्ण रोक लगेगी, मुख्य अधिकारी बदनामी से बचेंगे, नगरपालिका की आय बढ़ेगी और ट्रक ड्राइवरों को राहत मिलेगी। यह डिजिटल इंडिया मिशन का स्थानीय स्तर पर बेहतरीन उदाहरण बनेगा।यह किरंदुल नगरपालिका मुख्य अधिकारी से विस्तार से चर्चा की जाए। पूरे राज्य के नगरीय निकायों के लिए एक समान “यूनिफ़ॉर्म डिजिटल दखल शुल्क नीति” बनाई जाए। संपत्ति कर, जल कर, निर्माण अनुमति जैसी अन्य सेवाओं को भी चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन किया जाए।सरकार किरंदुल जैसे छोटे कस्बों में भी डिजिटल पारदर्शिता लाकर सरकार “न्यू छत्तीसगढ़” का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं।स्थानीय स्तर पर इसकी चर्चा तेज हो गई है और नागरिकों का कहना है कि अगर सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया तो न सिर्फ किरंदुल, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की नगरपालिकाओं में ई-गवर्नेंस की नई मिसाल कायम हो सकती है।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!