विकास नंद/ सर्वव्यापी
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने मंगलवार सुबह कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक लेकर जिले में संचालित शासकीय योजनाओं, सुशासन तिहार, जनगणना 2027 और विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार, अपर कलेक्टर सचिन भूतड़ा, रवि कुमार साहू, एसडीएम, विभागीय अधिकारी, जनपद सीईओ, नगरीय निकायों के सीएमओ सहित ब्लॉक स्तरीय अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।कलेक्टर ने सुशासन तिहार के तहत प्राप्त मांगों और शिकायतों के निराकरण की समीक्षा करते हुए सभी विभागों को समाधान शिविरों में अधिकतम आवेदनों का मौके पर ही निपटारा करने के निर्देश दिए। उन्होंने आवेदनों की पावती देने, समय पर कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने और पात्र हितग्राहियों को तत्काल लाभ वितरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही सभी आवेदनों की पोर्टल में अनिवार्य एंट्री करने के निर्देश भी दिए गए।उन्होंने कहा कि 5 मई से 20 मई तक विकसित संकल्प यात्रा के दौरान कृषि विभाग किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि और एग्रीटेक पंजीयन के प्रति जागरूक करे तथा प्रचार-प्रसार के लिए रथ का उपयोग बढ़ाए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।बैठक में जनगणना 2027 के तहत 1 मई से 30 मई तक चल रहे डिजिटल मकान सूचीकरण कार्य की समीक्षा करते हुए प्रगणकों और सुपरवाइजर्स को घर-घर जाकर कार्य पूर्ण करने तथा स्वगणना की जानकारी का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए।कलेक्टर ने सभी कार्यालयों में आधार आधारित उपस्थिति और ई-फाइल प्रणाली को शत-प्रतिशत लागू करने के निर्देश देते हुए अधिकारियों को बिना अनुमति जिला मुख्यालय छोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत अप्रैल, मई और जून माह के चावल के भंडारण व वितरण की समीक्षा करते हुए जिले की 593 दुकानों में तेजी लाने के निर्देश दिए।जल संरक्षण के लिए ‘मोर गांव मोर पानी अभियान 2.0’ के तहत अधिक से अधिक सोख्ता गड्ढे, डबरी और तालाब निर्माण पर जोर दिया गया। अब तक 10,455 जल संरचनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि 5,593 निर्माणाधीन हैं। प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण योजना के तहत लंबित कार्यों को शीघ्र प्रारंभ कराने के निर्देश भी दिए गए।बैठक में मुख्यमंत्री घोषणाओं, जन शिकायतों, कलेक्टर जनदर्शन, पीजी पोर्टल और लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए सभी अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।