विकास नंद/सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने दो दिनों की सुनवाई में कुल 120 प्रकरणों का निराकरण करते हुए कई मामलों में पीड़ित महिलाओं को राहत दिलाई। इस दौरान आयोग की समझाइश से कई पारिवारिक विवाद सुलझे, वहीं बच्चों के हित में टूटते रिश्ते भी जुड़ गए।आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, सदस्य सरला कोसरिया, ओजस्वी मंडावी एवं दीपिका शोरी ने रायपुर स्थित कार्यालय में महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई की।एक प्रकरण में मृतक महिला की संदिग्ध मौत (फांसी) के मामले में आयोग ने थाना सिहावा से जांच रिपोर्ट तलब करने के निर्देश दिए। साथ ही मृतका के शादी का सामान आवेदिका को वापस करने पर अनावेदक पक्ष सहमत हुआ।एक अन्य मामले में मां के साथ रह रहे बेटे-बहू द्वारा किराया व बिजली बिल नहीं देने और दुर्व्यवहार की शिकायत पर आयोग की समझाइश से अनावेदकगण आवेदिका को प्रतिमाह 5 हजार रुपये देने को तैयार हुए।संपत्ति विवाद के एक प्रकरण में फर्जी वसीयत और बैंक लोन के आरोपों को देखते हुए आयोग ने दोनों पक्षों को न्यायालय के माध्यम से समाधान कराने की सलाह देते हुए प्रकरण नस्तीबद्ध किया।पति-पत्नी के एक मामले में 17 माह की बच्ची के हित को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्षों में सुलह कराई गई, जिसके बाद दंपत्ति ने साथ रहने का निर्णय लिया।किराया विवाद के एक मामले में आयोग ने आवेदिका को एफआईआर दर्ज कराने एवं भाड़ा नियंत्रक अधिकारी के समक्ष प्रकरण प्रस्तुत करने की सलाह दी। वहीं जमीन कब्जे के मामले में भी आवेदिका को अपने अधिकारों की रक्षा हेतु कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
विशेष उपलब्धि:
आयोग की सक्रिय पहल से दो दिनों में दो परिवार बच्चों के कारण पुनः एकजुट हुए, जो सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।महिला आयोग की इस पहल से स्पष्ट है कि न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर भी समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे महिलाओं को त्वरित न्याय और सम्मान मिल सके।