इमली के पेड़ तले लगी अमित – किरण की ऐतिहासिक चौपाल।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ के सुदूर और संवेदनशील क्षेत्र सुकमा जिले में सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत प्रशासन ने जनसेवा और जनविश्वास की एक नई मिसाल पेश की है। जिला कलेक्टर अमित कुमार और पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने प्रशासनिक अमले के साथ मोटरसाइकिल से लगभग 30 किलोमीटर लंबे दुर्गम, कच्चे और उबड़-खाबड़ रास्तों को पार कर पहुंचविहीन ग्राम गोंडेरास और नीलावाया का दौरा किया। यह दौरा केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं बल्कि शासन को गांव की चौखट तक पहुंचाने की संवेदनशील पहल बन गया।घने जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच स्थित इन गांवों में पहली बार जिले के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी इस तरह सीधे ग्रामीणों के बीच पहुंचे। गांव पहुंचते ही किसी मंच या विशेष व्यवस्था के बजाय इमली के विशाल पेड़ के नीचे चौपाल सजाई गई, जहां कलेक्टर और एसपी जमीन पर बैठकर ग्रामीणों से रूबरू हुए। इस दृश्य ने ग्रामीणों के मन में प्रशासन के प्रति नया विश्वास पैदा किया। ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं, आवश्यकताएं और वर्षों से लंबित मांगें अधिकारियों के सामने रखीं।सुशासन तिहार अभियान के तहत जिला प्रशासन द्वारा 31 व्यक्तिगत हितग्राही योजनाओं तथा 14 सामुदायिक सुविधाओं को सीधे गांवों तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। इनमें राशन कार्ड, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, वनाधिकार पत्र, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, सड़क, शिक्षा और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं। प्रशासन का उद्देश्य यह है कि दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए जिला मुख्यालय या ब्लॉक कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।कलेक्टर अमित कुमार ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सुशासन तिहार का उद्देश्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांवों की समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए और प्रत्येक पात्र हितग्राही को योजनाओं का लाभ मिले। वहीं पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने ग्रामीणों से संवाद करते हुए भरोसा दिलाया कि पुलिस और प्रशासन हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है तथा क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।ग्रामीणों ने भी प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पहली बार जिले के वरिष्ठ अधिकारी इतने कठिन रास्तों से होकर सीधे गांव पहुंचे हैं। चौपाल के दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने अपनी बात खुलकर रखी। कई ग्रामीण भावुक भी नजर आए और उन्होंने कहा कि अब उन्हें लगने लगा है कि सरकार सचमुच उनके गांव तक पहुंच रही है।सुकमा जिले के गोंडेरास और नीलावाया में आयोजित यह चौपाल केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और संवेदनशीलता का जीवंत उदाहरण बन गया। दुर्गम अंचलों में मोटरसाइकिल से पहुंचकर इमली के पेड़ के नीचे जमीन पर बैठा प्रशासन अब सुशासन की नई तस्वीर के रूप में देखा जा रहा है।


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