तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
बिलासपुर संभाग अंर्तगत गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वनमंडल के जंगलों में सागौन की अवैध कटाई का मामला अब केवल वन अपराध नहीं, बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पेण्ड्रारोड वन परिक्षेत्र के पंडरीपानी क्षेत्र से 500 से अधिक सागौन की बल्लियां जब्त होने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर अवैध कटाई बिना विभागीय संरक्षण और मिलीभगत के कैसे संभव हो सकती है।जानकारी के अनुसार वन विभाग द्वारा अलग-अलग गांवों में दबिश देकर ग्रामीणों के घरों और ठिकानों से सागौन की बल्लियां बरामद की गई हैं। विभाग इसे अपनी बड़ी कार्रवाई बता रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि यदि जंगलों में लगातार कटाई हो रही थी तो विभागीय अमला अब तक क्या कर रहा था? जंगलों में पेड़ों की कटाई, परिवहन और भंडारण जैसी गतिविधियां रातोंरात संभव नहीं होतीं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या संबंधित बीट गार्ड, डिप्टी रेंजर और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी?सूत्रों के मुताबिक जिन क्षेत्रों से लकड़ी बरामद हुई है, वहां लंबे समय से अवैध कटाई की शिकायतें मिलती रही हैं। बावजूद इसके वन विभाग की ओर से समय पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यही कारण है कि अब विभाग की कार्रवाई को “दिखावटी” और “निचले स्तर पर जिम्मेदारी तय कर बड़े अधिकारियों को बचाने का प्रयास” बताया जा रहा है।वन विशेषज्ञों का मानना है कि सागौन जैसी कीमती लकड़ी की अवैध कटाई कोई छोटा-मोटा काम नहीं है। पेड़ों को काटने, बल्लियां तैयार करने, उन्हें गांवों तक पहुंचाने और लंबे समय तक छिपाकर रखने के लिए संगठित नेटवर्क की जरूरत होती है। ऐसे में केवल ग्रामीणों पर कार्रवाई कर विभाग अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। यदि निष्पक्ष जांच हो तो कई जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है।वहीं स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा यह पता लगाया जाए कि आखिर वर्षों से चल रहे इस अवैध कारोबार को किसका संरक्षण प्राप्त था। लोगों का कहना है कि यदि वन विभाग समय रहते सक्रिय रहता तो जंगलों की इतनी बड़ी क्षति नहीं होती।अब देखना यह होगा कि वन विभाग केवल जब्ती और छोटे आरोपियों पर कार्रवाई तक सीमित रहता है या फिर विभाग के भीतर बैठे उन जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई होती है जिनकी लापरवाही अथवा मिलीभगत से जंगलों का सीना चीरकर सागौन की तस्करी का खेल चलता रहा।