कृषि मंत्री के कार्यालय में प्रोटोकॉल पर सवाल, राज्यपाल की तस्वीर चौथे स्थान पर क्यों?

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ शासन के कृषि मंत्री रामविचार नेताम के नवा रायपुर स्थित शासकीय निवास सह कार्यालय की एक तस्वीर सामने आने के बाद अब केवल “फोटो कॉल” ही नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रोटोकॉल को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।वायरल तस्वीर में कार्यालय की दीवार पर क्रमवार राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल की तस्वीरें लगी दिखाई दे रही हैं। संवैधानिक जानकारों और प्रशासनिक हलकों में इस बात को लेकर चर्चा है कि किसी भी राज्य के शासकीय कार्यालय में प्रोटोकॉल के तहत राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बाद राज्यपाल का स्थान होना चाहिए, क्योंकि राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख होते हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री की तस्वीर लगाई जाती है।लेकिन मंत्री कार्यालय में दिखाई दे रहे फोटो क्रम में मुख्यमंत्री की तस्वीर राज्यपाल से ऊपर और पहले स्थान पर दिखाई दे रही है, जिसे कई लोग संवैधानिक मर्यादा और प्रोटोकॉल की अनदेखी मान रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या मंत्री कार्यालय में फोटो लगाने से पहले सामान्य प्रशासन विभाग अथवा प्रोटोकॉल नियमों का पालन नहीं किया गया?राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि एक मंत्री का कार्यालय केवल राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र नहीं होता, बल्कि वह शासन और संविधान की गरिमा का प्रतीक भी माना जाता है। ऐसे में यदि वहां संवैधानिक पदों के सम्मान और क्रम में त्रुटि दिखाई देती है, तो यह केवल तकनीकी गलती नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का विषय भी बन सकता है।अब यह मांग भी उठने लगी है कि कृषि मंत्री कार्यालय इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करे और यदि प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है तो तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।फिलहाल इस पूरे मामले में मंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन तस्वीर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन चुकी है।


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