1.5 करोड़ के एलपीजी गैस गबन का मास्टरमाइंड निकला जिला खाद्य अधिकारी, 40 सदस्यीय टीम ने खोली साजिश की परतें।

Share Now

विकास नंद/ सर्वव्यापी

जिले में जब्त एलपीजी गैस कैप्सूल से करोड़ों रुपये के गैस गबन मामले में पुलिस जांच ने बड़ा खुलासा किया है। मामले में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को मुख्य षड्यंत्रकारी बताते हुए पुलिस ने बताया कि गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर और रायपुर निवासी मनीष चौधरी के साथ मिलकर करीब 1.5 करोड़ रुपये मूल्य की गैस के गबन की साजिश रची गई थी।

पुलिस के अनुसार, सुपुर्दनामा प्रक्रिया के बहाने 6 गैस कैप्सूल में भरी एलपीजी गैस को ठिकाने लगाने की योजना बनाई गई थी। विभिन्न एजेंसियों से बातचीत के बाद ठाकुर पेट्रोकेमिकल के साथ 80 लाख रुपये में सौदा तय किया गया। जांच में सामने आया कि इस रकम में 50 लाख रुपये खाद्य अधिकारी अजय यादव, 20 लाख रुपये पंकज चंद्राकर और 10 लाख रुपये मनीष चौधरी के हिस्से में तय हुए थे।23 मार्च से शुरू हुई थी साजिशपुलिस जांच के मुताबिक, 23 मार्च को खाद्य अधिकारी अजय यादव और पंकज चंद्राकर के बीच पहली गुप्त बैठक हुई, जिसमें गैस गबन की पूरी पटकथा तैयार की गई। पंकज चंद्राकर को उपयुक्त एजेंसी तलाशने और पूरे क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गई, जबकि रायपुर के मनीष चौधरी को एजेंसियों से संपर्क कर सौदे को अंतिम रूप देने का काम सौंपा गया।26 मार्च को अजय यादव और पंकज चंद्राकर सिंघोड़ा थाना पहुंचे, जहां उन्होंने जब्त 6 कैप्सूल में उपलब्ध गैस की मात्रा का आंकलन किया। अनुमानित 102 से 105 मीट्रिक टन गैस की उपलब्धता के बाद एक करोड़ रुपये उगाही की योजना पर सहमति बनी। उसी रात संभावित एजेंसी संचालकों के साथ बैठकें शुरू हुईं और बाद में ठाकुर पेट्रोकेमिकल के साथ 80 लाख रुपये में डील फाइनल कर दी गई।सुपुर्दनामे के बाद निकाली गई गैसपुलिस के अनुसार, 30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग की मौजूदगी में 6 एलपीजी गैस कैप्सूल ट्रकों को सुरक्षा के नाम पर ठाकुर पेट्रोकेमिकल को सुपुर्द किया गया। इसके बाद एक सप्ताह के भीतर कैप्सूल से करीब 92 टन गैस निकाल ली गई।जांच में यह भी सामने आया कि खाद्य अधिकारी ने विभागीय कर्मचारियों को सुपुर्दनामा दस्तावेजों में हस्ताक्षर नहीं करने और कैप्सूल का वास्तविक वजन नहीं कराने के निर्देश दिए थे। पुलिस को भी भ्रमित करने का प्रयास किया गया।फर्जी पंचनामा बनाकर छिपाया गया खेलमामले में कूटरचना और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के भी गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस के अनुसार, कैप्सूल खाली करने के बाद 6 और 8 अप्रैल को उनका वजन कराया गया, लेकिन वजन प्रक्रिया के दौरान न तो एजेंसी संचालक मौजूद थे और न ही स्वतंत्र गवाह।वजन संबंधी पंचनामा खाद्य अधिकारी के कार्यालय में तैयार किया गया और उसी कार्यालय में हस्ताक्षर कराए गए। इतना ही नहीं, वास्तविक वजन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही पंचनामा दस्तावेज में मात्रा दर्ज कर उसे कलेक्टोरेट में जमा करा दिया गया था।रकम के लेन-देन का खुलासाजांच में सामने आया कि सुपुर्दनामे के दूसरे दिन ही अजय यादव को 50 लाख रुपये पहुंचा दिए गए थे। बाकी 30 लाख रुपये की व्यवस्था में देरी होने पर संतोष ठाकुर से मनीष चौधरी के खाते में ‘श्योरिटी’ के रूप में 30 लाख रुपये डलवाए गए थे, जिन्हें बाद में नकद भुगतान मिलने पर वापस कर दिया गया।पुलिस की तकनीकी जांच से खुला राजपुलिस ने बताया कि 40 सदस्यीय टीम ने 15 दिनों तक लगातार तकनीकी विश्लेषण, सीडीआर जांच, साइंटिफिक इंटरोगेशन और दस्तावेजी विवेचना कर पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश किया। तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट में सभी गैस कैप्सूल पूरी तरह सुरक्षित और लीकेज रहित पाए गए। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि 100 टन गैस का स्वतः लीकेज होना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।गिरफ्तार आरोपीपुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है —पंकज चंद्राकर, निवासी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, महासमुंद मनीष चौधरी, निवासी मोवा, रायपुर अजय कुमार यादव, जिला खाद्य अधिकारी जब्त सामग्री पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, नगदी और घरेलू सामान सहित कुल 6 लाख 11 हजार 700 रुपये की संपत्ति जब्त की है।पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक न्यास भंग, आपराधिक षड्यंत्र, कूटरचना, कालाबाजारी और शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!