विकास नंद/सर्वव्यापी

जिले में अपराध नियंत्रण और जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही महासमुंद पुलिस अब बड़े रसूखदारों और प्रभावशाली लोगों पर भी सख्त कार्रवाई करती दिखाई दे रही है।
चर्चित एलपीजी गैस गबन कांड में जिस तरह से बड़े अधिकारी, उद्योगपतियों और राजनीतिक प्रभाव रखने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उससे यह साफ संकेत मिला है कि जिले में कानून से ऊपर कोई नहीं है।
महासमुंद पुलिस की कार्रवाई ने यह साबित किया है कि चाहे मामला किसी सत्तासीन भाजपा नेता से जुड़ा हो, किसी बड़े अधिकारी का हो या फिर उद्योग जगत से जुड़े प्रभावशाली लोगों का, यदि अपराध और भ्रष्टाचार में संलिप्तता सामने आती है तो कार्रवाई तय है।
जिले में सुशासन और पारदर्शिता को लेकर प्रशासन और पुलिस की सख्ती अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगी है।दरअसल, जब्त एलपीजी गैस कैप्सूल से करोड़ों रुपये के गैस गबन मामले में पुलिस जांच ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को पूरे षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार बताया गया है। पुलिस के अनुसार गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर और रायपुर निवासी मनीष चौधरी के साथ मिलकर गैस गबन की सुनियोजित योजना बनाई गई थी।
जांच में सामने आया कि सुपुर्दनामा प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए 6 गैस कैप्सूल में भरी लगभग 1.5 करोड़ रुपये मूल्य की एलपीजी गैस को ठिकाने लगाने की साजिश रची गई। विभिन्न एजेंसियों से बातचीत के बाद ठाकुर पेट्रोकेमिकल के साथ 80 लाख रुपये में डील फाइनल हुई थी। पुलिस के मुताबिक इस रकम में 50 लाख रुपये खाद्य अधिकारी अजय यादव, 20 लाख रुपये पंकज चंद्राकर और 10 लाख रुपये मनीष चौधरी के हिस्से में तय किए गए थे।पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि षड्यंत्र के तहत कैप्सूल का वास्तविक वजन नहीं कराया गया और बाद में फर्जी पंचनामा तैयार कर दस्तावेजों में हेराफेरी की गई। सुपुर्दनामे के बाद एक सप्ताह के भीतर 92 टन गैस निकाल ली गई थी।
महासमुंद पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, सीडीआर जांच, साइंटिफिक इंटरोगेशन और सूक्ष्म विवेचना के आधार पर पूरे मामले का खुलासा किया। 40 सदस्यीय टीम ने लगातार 15 दिनों तक जांच कर इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें खोलीं।मामले में अब तक खाद्य अधिकारी अजय यादव, पंकज चंद्राकर और मनीष चौधरी को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नगदी, मोबाइल फोन और अन्य सामग्री भी जब्त की है।
जिले में चल रही इस कार्रवाई को लेकर आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि महासमुंद में जीरों टारलेंस की नीति महज सरकारी जुमला नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ कठोर कार्रवाई के रूप में भी नजर आने लगा है। पुलिस और प्रशासन की इस कार्रवाई को लोग “रसूखदारों पर सुशासन का डंडा” बता रहे हैं।