रैली में हेलमेट, बाकी दिन नियम फेल! जनता पर चालान की सख्ती, खुद नियमों से दूर दिखती पुलिस व्यवस्था।

Share Now

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों को लेकर पुलिस विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। शहरों में रैली निकालकर हेलमेट पहनने, दस्तावेज साथ रखने और प्रदूषण जांच कराने का संदेश दिया जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई देती है।तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी सामूहिक रूप से हेलमेट पहनकर जागरूकता रैली निकाल रहे हैं, लेकिन आम दिनों में शहर की सड़कों पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी बिना हेलमेट दुपहिया वाहन चलाते नजर आते हैं। यही नहीं, कई पुलिस वाहनों में प्रदूषण प्रमाण पत्र, बीमा और अन्य जरूरी दस्तावेज भी अपडेट नहीं होने के आरोप लंबे समय से उठते रहे हैं।आम जनता के वाहनों को रोककर लाइसेंस, आरसी, बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र की सख्ती से जांच की जाती है। दस्तावेज अधूरे मिलने पर तत्काल चालान काटा जाता है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या यही नियम पुलिस विभाग पर लागू नहीं होते?शहर में अक्सर देखा जाता है कि कई पुलिस कर्मचारी बिना हेलमेट सरकारी और निजी दुपहिया वाहनों में घूमते हैं। कुछ वाहनों में नंबर प्लेट तक मानकों के अनुरूप नहीं होती। इसके बावजूद कार्रवाई शून्य नजर आती है। ऐसे में लोगों के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं, विभागीय अमले के लिए नहीं।यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा का सबसे बड़ा संदेश व्यवहार से जाता है, भाषण और रैली से नहीं। जब नियम लागू कराने वाला तंत्र खुद उनका पालन नहीं करेगा तो जनता में जागरूकता का असर भी कमजोर पड़ेगा।स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पुलिस विभाग पहले अपने कर्मचारियों और वाहनों की नियमित जांच कराए। बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले पुलिसकर्मियों पर भी उसी तरह कार्रवाई हो, जैसे आम नागरिकों पर की जाती है।सवाल अब सिर्फ हेलमेट का नहीं, बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता का है। क्योंकि कानून का सम्मान तभी होगा, जब कानून लागू कराने वाले खुद उसे ईमानदारी से मानते दिखाई देंगे।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!