जल जीवन मिशन की बदहाल तस्वीर: सुशासन तिहार में अफसरों की लग रही क्लास, लापरवाह रसूखदार ठेकेदारों पर कलेक्टर से सख़्त कारवाई की मांग।

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विकास नंद/ सर्वव्यापी/

महासमुंद जिले के सरायपाली विधानसभा क्षेत्र में आयोजित सुशासन तिहार शिविरों में इन दिनों सबसे अधिक गूंज पेयजल संकट की सुनाई दे रही है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना, जिसका उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है, अब कई गांवों में बदहाल व्यवस्था और अधूरे कार्यों के कारण सवालों के घेरे में आ गई है।प्रदेश की Vishnu Deo Sai सरकार गांव-गांव पहुंचकर जनता से सीधा संवाद कर योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने का प्रयास कर रही है, लेकिन सुशासन तिहार के शिविरों में सामने आ रही शिकायतें जल जीवन मिशन की पोल खोलती नजर आ रही हैं। बड़ी संख्या में ग्रामीण पेयजल समस्या से जुड़े आवेदन लेकर शिविरों में पहुंच रहे हैं। कहीं पाइपलाइन अधूरी पड़ी है, तो कहीं पानी टंकी बनने के बावजूद जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। कई गांवों में नल-जल योजना केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है।ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में जल जीवन मिशन के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार हुआ। अब स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गांवों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं। सुशासन तिहार के मंचों से जनप्रतिनिधियों द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को खुलकर फटकार लगाई जा रही है।जानकारी के अनुसार सरायपाली विकासखंड में जल जीवन मिशन के तहत लगभग 237 कार्य स्वीकृत किए गए थे, जिनमें विभाग द्वारा केवल 96 कार्य पूर्ण बताए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक संरक्षण प्राप्त ठेकेदारों की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। आरोप है कि पिछली सरकार के दौरान जिन ठेकेदारों को काम मिला था और जिनके कार्य आज तक अधूरे पड़े हैं, वही ठेकेदार अब भी सक्रिय हैं।सूत्रों के अनुसार कार्य में लापरवाही बरतने वाले 62 ठेकेदारों का अनुबंध निरस्त करने के लिए प्रस्ताव जिला कलेक्टर को भेजा गया है। इनमें प्रमुख रूप से सालासर एसोसिएट रायपुर, सरस्वती दुबे रायपुर, ध्रुवी कंस्ट्रक्शन सरायपाली, पीयूष कंस्ट्रक्शन सरायपाली, शिवम कंस्ट्रक्शन महासमुंद और जीआरडी बिल्डकॉन के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। जानकारी यह भी सामने आ रही है कि इन ठेकेदारों को कुल राशि का लगभग 60 प्रतिशत से अधिक भुगतान पहले ही किया जा चुका है।ग्रामीणों का कहना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद भी प्रभावशाली ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके कारण योजनाएं अधूरी पड़ी हैं और आम जनता परेशान हो रही है। अब सुशासन तिहार के शिविरों में उठ रही शिकायतें यह बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं कि आखिर ग्रामीणों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने में विफलता का जिम्मेदार कौन है — लापरवाह अधिकारी, अधूरे कार्य करने वाले ठेकेदार या फिर पूरी भ्रष्ट व्यवस्था?फिलहाल जिले के कलेक्टर Vinay Kumar Langeh को सख्त कार्रवाई के लिए जाना जाता है। ऐसे में अब पूरे जिले की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि जल जीवन मिशन की बदहाल व्यवस्था और कथित अनियमितताओं पर प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।


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