नूर मोहम्मद ,गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (सर्वव्यापी)
मरवाही वनमंडल में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और विकास कार्यों में गड़बड़ियों को लेकर सर्वव्यापी द्वारा लगातार प्रकाशित की जा रही खोजी खबरों के बाद अब मामला एक नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। विभागीय सूत्रों और कुछ अधिकारियों के दावों के अनुसार, इन खुलासों से विभाग के कुछ प्रभावशाली अधिकारी और ठेकेदार असहज हैं।सर्वव्यापी को मिली जानकारी के अनुसार, समाचार पत्र के संपादक तरुण कौशिक को कथित रूप से “देख लेने” और झूठे मामलों में फंसाने जैसी धमकियां दिए जाने की चर्चाएं विभाग के भीतर चल रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और जिन अधिकारियों या व्यक्तियों का नाम लिया जा रहा है, उनका पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। क्या खुलासों से घबराए जिम्मेदार लोग?सूत्रों का दावा है कि पिछले कई महीनों से मरवाही वनमंडल में पौधारोपण, निर्माण कार्य, सामग्री खरीदी और अन्य योजनाओं से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। इन मामलों पर दस्तावेजों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर प्रकाशित खबरों के बाद विभाग में हलचल तेज हो गई है।कुछ अधिकारियों का कहना है कि यदि समाचारों में प्रकाशित तथ्यों पर किसी को आपत्ति है, तो उसका उत्तर दस्तावेजों और आधिकारिक स्पष्टीकरण से दिया जाना चाहिए, न कि कथित दबाव या धमकी के माध्यम से।”पत्रकार को डराना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं”कुछ ईमानदार अधिकारियों ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर कहा कि यदि कोई पत्रकार उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर समाचार प्रकाशित कर रहा है, तो उसका जवाब तथ्यों से दिया जाना चाहिए। लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता प्रशासनिक जवाबदेही का महत्वपूर्ण आधार है। सर्वव्यापी का स्पष्ट रुखसर्वव्यापी प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि जनहित से जुड़े मुद्दों को तथ्यात्मक रूप से सामने लाना है। यदि प्रकाशित किसी समाचार पर किसी पक्ष को आपत्ति है, तो उसका अधिकृत पक्ष या तथ्यात्मक खंडन प्रकाशित करने के लिए समाचार पत्र सदैव तैयार है।संपादक तरुण कौशिक ने कहा कि यदि किसी भी प्रकार की धमकी या दबाव के माध्यम से पत्रकारिता को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है, तब भी जनहित के मुद्दों को उठाने का कार्य जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष पत्रकारिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।पत्रकार संगठन भी आए समर्थन मेंग्लोबल जर्नलिस्ट एंड मीडिया संघ, छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष हरीश चौबे ने कहा कि यदि किसी पत्रकार को उसके पेशेवर कार्य के कारण धमकी दी जाती है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन के प्रदेश महासचिव तरुण कौशिक लंबे समय से विभिन्न विभागों और जनहित के मामलों पर दस्तावेजों के आधार पर खबरें प्रकाशित करते रहे हैं। यदि किसी प्रकार का अनुचित दबाव बनाया जाता है, तो संगठन लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से उसका विरोध करेगा।अब सबकी निगाहें जांच परमरवाही वनमंडल से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और पत्रकार को कथित धमकी के दावों के बीच अब लोगों की निगाहें शासन और सक्षम जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। यदि आरोप सही हैं तो दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए, और यदि आरोप निराधार हैं तो संबंधित पक्ष को भी अपना पक्ष रखने और न्याय पाने का पूरा अधिकार है। यही लोकतंत्र और कानून के शासन की मूल भावना है।(नोट: इस समाचार में उल्लिखित धमकी और भ्रष्टाचार संबंधी आरोप विभागीय सूत्रों एवं संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित अधिकारियों या अन्य पक्षों का अधिकृत पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)


