विकास नंद/ सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक एवं सदस्यगण सरला कोसरिया, लक्ष्मी वर्मा, ओजस्वी मण्डावी एवं दीपिका शोरी की उपस्थिति में आयोग कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों की सुनवाई की गई।
सुनवाई के दौरान आयोग ने विभिन्न मामलों में अहम निर्णय और अनुशंसाएं कीं—भरण-पोषण प्रकरण : आयोग की समझाईश पर एक आवेदिका को उसके पति द्वारा 7 लाख रुपये एकमुश्त भरण-पोषण के रूप में देने का निर्णय हुआ।
अनुभव प्रमाण पत्र व वेतन : एक प्रकरण में आवेदिका को अनुभव प्रमाण पत्र और 45 हजार रुपये का बकाया वेतन दिलाया गया।पति-पत्नी विवाद : एक मामले में पति के अवैध संबंध पर आयोग ने दूसरी महिला को चेतावनी दी और पति को निर्देशित किया कि वह अकेले में महिला से न मिले।
लिव-इन संबंध का मामला : दूसरी महिला द्वारा पति संग लिव-इन संबंध की स्वीकारोक्ति पर आयोग ने मामले को न्यायालयीन प्रक्रिया में मानते हुए नस्तीबद्ध किया और आवेदिका को आगे की कार्रवाई हेतु बिलासपुर कलेक्टर को आवेदन प्रस्तुत करने की सलाह दी।
कैंसर पीड़ित महिला का मामला : आवेदिका के गंभीर इलाज हेतु आयोग की समझाईश पर पति ने समस्त स्त्रीधन लौटाने की सहमति दी।मेडिकल छात्रा को न्याय : नीट पास छात्रा को जाति प्रमाण पत्र जारी करने से रोके जाने पर आयोग ने पटवारी, कोटवार को निलंबित करने और सरपंच को पद से हटाने की अनुशंसा की।
साथ ही कलेक्टर महासमुंद को एक सप्ताह के भीतर जाति प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया।
जातिसूचक गालियां और मारपीट प्रकरण : तीन प्रकरणों में गंभीर शिकायतों पर आयोग ने अनावेदकों की पुलिस माध्यम से उपस्थिति सुनिश्चित कराने तथा 25 जुलाई 2025 की घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने हेतु डीजीपी को पत्र भेजने का निर्णय लिया।
महिला आयोग की इस सुनवाई ने एक बार फिर यह साबित किया कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाने के लिए आयोग दृढ़ता से कार्य कर रहा है।