तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इन दिनों अपने प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह और मुख्य सचिव अमिताभ जैन सहित वरिष्ठ अफसरों की टीम के साथ जापान और दक्षिण कोरिया के दौरे पर हैं।
उद्देश्य बताया जा रहा है—निवेश आकर्षित करना, औद्योगिक सहयोग बढ़ाना और नई तकनीकों को राज्य तक लाना। लेकिन सवाल वही पुराना है—क्या इन विदेश यात्राओं का वास्तविक लाभ छत्तीसगढ़ की जनता तक पहुँच पाता है?
डॉ. रमन सिंह (2003-2018) की15 साल के लंबे कार्यकाल में कई देशों की यात्राएँ कीं। अमेरिका, जर्मनी, जापान और दुबई जैसे देशों में जाकर निवेश आमंत्रित किया। हालांकि, बड़े पैमाने पर निवेश के दावे तो किए गए, लेकिन आज भी राज्य में रोजगार और उद्योगों की स्थिति संतोषजनक नहीं मानी जाती।
भूपेश बघेल (2018-2023) की कांग्रेस सरकार के दौरान भी विदेश यात्राएँ हुईं। दावा किया गया कि छत्तीसगढ़ की कृषि, पर्यटन और खनिज संपदा को वैश्विक स्तर पर प्रमोट किया जाएगा। मगर, ठोस औद्योगिक निवेश के बड़े उदाहरण सामने नहीं आ पाए। भाजपा और कांग्रेस दोनों सरकारों के कई मंत्री भी अलग-अलग देशों की यात्राएँ कर चुके हैं। पर्यटन विकास, स्मार्ट सिटी, शिक्षा, स्वास्थ्य मॉडल या खनन क्षेत्र के नाम पर इन दौरों की योजनाएँ बनीं, लेकिन आम जनता को सीधे लाभ कितना मिला—
यह अब भी बहस का विषय है।वहीं इस तरह के दौरे से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की पहचान बनती है। कुछ तकनीकी सहयोग और MoU साइन होते हैं। राज्य की छवि निवेशकों के बीच बेहतर होती है।वहीं कहा जा रहा है कि अधिकतर समझौते कागज तक सीमित रह जाते हैं। करोड़ों का खर्च जनता की गाढ़ी कमाई से होता है। रोजगार, निवेश और उद्योग में जमीनी परिणाम नगण्य।विदेश यात्रा की रिपोर्ट और वास्तविक उपलब्धियों का कोई सार्वजनिक ऑडिट नहीं होता। आम जनता यह जानना चाहती है कि इतना खर्च करने के बाद आखिर उसके हिस्से में क्या आया?चाहे भाजपा की सरकार रही हो या कांग्रेस की, विदेश यात्राएँ “विकास” के नाम पर होती रही हैं। लेकिन दो दशक बीतने के बाद भी छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी, पलायन और उद्योगों की कमी जैसे सवाल जस के तस हैं। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की यह विदेश यात्रा सिर्फ “दौरा” बनकर रह जाएगी या वास्तव में छत्तीसगढ़ को ठोस औद्योगिक और रोजगार लाभ दिलाएगी।