विकास नंद/ सर्वव्यापी/

जिला पंचायत महासमुंद की अध्यक्ष मोंगरा किशन पटेल द्वारा कलेक्टर महासमुंद को किसानों की समस्या से जुड़ा एक पत्र प्रेषित किया गया है। पत्र में सरायपाली ब्लॉक की सहकारी समितियों में यूरिया एवं डी.ए.पी. खाद की कमी की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए आवश्यक मात्रा में खाद उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
पत्र में कहा गया है कि इन दिनों किसानों को बोनी कार्य के लिए समय पर खाद नहीं मिल पा रहा है। प्राथमिक सहकारी समितियों में खाद न मिलने से किसानों को मजबूरी में निजी दुकानों से महंगे दाम पर यूरिया-डी.ए.पी. खरीदना पड़ रहा है। इस कारण किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। जिला पंचायत अध्यक्ष ने प्रशासन से तत्काल व्यवस्था करने की मांग की है।
मोनो के उपयोग पर विवाद
पत्र के साथ ही अब एक अलग पहलू चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल, पत्र जिला पंचायत अध्यक्ष के लेटर पैड पर जारी हुआ है, जिसमें छत्तीसगढ़ शासन का शासकीय मोनो (राजचिह्न) छपा हुआ है।
नियमों के अनुसार शासन का मोनो केवल शासकीय विभागों, कार्यालयों और अधिकृत अधिकारियों के पत्राचार में प्रयोग किया जा सकता है।जनप्रतिनिधि, जैसे जिला पंचायत अध्यक्ष, सरपंच, विधायक या सांसद आदि अपने निजी लेटर पैड पर शासन का मोनो उपयोग नहीं कर सकते।
विशेषज्ञों का मानना है कि शासन के प्रतीक चिन्ह का प्रयोग केवल अधिकृत शासकीय उपयोग के लिए है। यदि इसे जनप्रतिनिधि अपने निजी पत्रों या लेटर पैड में प्रयोग करते हैं तो यह नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।किसानों की समस्या और प्रशासन की जिम्मेदारी जहां एक ओर शासन के मोनो के उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पत्र की मूल भावना किसानों की परेशानी को उजागर करती है।
वर्तमान समय में बोनी कार्य जोरों पर है और किसानों को खाद की अत्यधिक आवश्यकता है।
यदि समय पर खाद उपलब्ध नहीं हुई तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
किसानों को मजबूरी में खुले बाजार से ऊंचे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है।
प्रशासनिक समीक्षा अपेक्षित
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस मामले के किस पक्ष पर ध्यान केंद्रित करता है –
1. किसानों की खाद संबंधी तात्कालिक समस्या का समाधान करने पर,
या
2. शासन के मोनो के उपयोग को लेकर नियमों की समीक्षा एवं आवश्यक कार्रवाई पर।