विकास नंद/ सर्वव्यापी/
संस्कार साहित्य सेवा समिति के बैनर तले गत दिवस बिछियां की पावन धरा पर साहित्यिक वातावरण से सराबोर बैठक सह काव्यगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदे की वंदना के साथ हुआ।मुख्य अतिथि पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. हेमंत खटकर ने अपने उद्बोधन में साहित्य और संस्कृति के संवर्धन पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए।काव्यगोष्ठी में ग़ज़लकार परशुराम चौहान ने मधुरिम मुक्तकों से शुरुआत की। गोकुलानंद चौहान चुलबुला ने मनोहारी शृंगार सृजन प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर किया। डिजेंद्र कुर्रे कोहिनूर ने ओजपूर्ण घनाक्षरी से देशप्रेम की गंगा प्रवाहित की। वहीं, डॉ. सुकमोती चौहान रूचि ने शृंगार के लाजवाब शेर पेश किए।धनीराम नंद मस्ताना ने गणेश वंदना स्वरूप सुमधुर गीत प्रस्तुत किया तो विनोद कुमार चौहान जोगी ने ओजपूर्ण मुक्तक व संदेश गीतों से समां बाँध दिया। अंत में मानक मगन ने उत्कृष्ट मुक्तकों के साथ गोष्ठी का सुंदर समापन किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष डॉ. सुकमोती चौहान ने की। बैठक में आगामी आयोजनों की रूपरेखा तय की गई तथा समिति के विकास के लिए कार्ययोजना भी बनाई गई।