तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
बिलासपुर तहसील कार्यालय के भीतर घटित एक प्रकरण ने तहसीलदार गरिमा सिंह ठाकुर की साख पर सवाल खड़े कर दिए। ग्राम पंचायत कोरमी निवासी ने तहसीलदार पर बीस हजार रुपये रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप जड़ा, लेकिन जब सर्वव्यापी टीम ने इस मामले की गहराई में जाने की कोशिश की तो असलियत कुछ और ही निकली।जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि सीधे तहसीलदार ने किसी से न तो रिश्वत की मांग की, न ही पैसे लिए। दरअसल, तहसीलदार गरिमा सिंह ठाकुर के अधीनस्थ कर्मचारियों ने ही उनके नाम का इस्तेमाल करते हुए रुपये की मांग की थी। इतना ही नहीं, पीड़ित ने इन कर्मचारियों को “चाय-नाश्ते” के नाम पर कुछ रुपये भी थमा दिए।लेकिन लगातार परेशान किए जाने के बाद ग्रामीण ने सीधे तहसीलदार गरिमा सिंह ठाकुर पर ही आरोप लगा दिया। नतीजा यह हुआ कि अधीनस्थों की करतूत का ठीकरा गरिमा सिंह ठाकुर पर फूट गया और उनकी गरिमा पर ही चोट पहुंचाई गई।अब बड़ा सवाल यह है कि मुखिया की कुर्सी पर बैठी तहसीलदार गरिमा सिंह ठाकुर को भी अपने कर्मचारियों की हरकतों पर पैनी नज़र रखने की ज़रूरत है। वरना जनता की नाराज़गी और कर्मचारियों की करतूत का बोझ हमेशा उन्हीं को उठाना पड़ेगा।