तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
बिलासपुर संभाग अंतर्गत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला अस्पताल एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आपरेशन थियेटर से मरीज का नग्न अवस्था में वीडियो वायरल होना महज एक घटना नहीं, बल्कि शर्मनाक लापरवाही है ,जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की कलई खोल दी है।विडंबना यह है कि इस मामले में एक चिकित्सक के पिता पर एफआईआर दर्ज कर दी गई है। लेकिन असल सवाल यही है कि क्या केवल एक व्यक्ति को बलि का बकरा बना देने से अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी खत्म हो जाएगी?विभागीय नियम साफ कहते हैं कि आपरेशन थियेटर (OT) में सीसीटीवी कैमरे तो होते हैं, परंतु किसी मरीज का वीडियो उसकी सहमति के बिना न रिकॉर्ड होना चाहिए और न ही बाहर आना चाहिए। फिर यह वीडियो बाहर कैसे पहुंचा? क्या अस्पताल के भीतर बैठे जिम्मेदार अफसरों की भूमिका संदिग्ध नहीं है?यह घटना केवल मरीज की गोपनीयता का उल्लंघन नहीं, बल्कि पूरे चिकित्सा तंत्र पर से भरोसा तोड़ने वाला अपराध है। सोचिए, अगर जिला अस्पताल जैसा सरकारी संस्थान ही मरीज की गरिमा सुरक्षित न रख सके, तो आम जनता भरोसा कहां करेगी?आज जरूरत है कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग महज जांच का राग अलापने के बजाय सख्त कार्रवाई करे। क्योंकि यह मामला सिर्फ एक परिवार या एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हर उस मरीज का है जो सरकारी अस्पतालों पर भरोसा करके अपनी जिंदगी सौंपता है। सवाल सीधा है कि मरीज की अस्मिता से खिलवाड़ करने वाला असली जिम्मेदार कौन है?जब तक इस प्रश्न का ईमानदार जवाब नहीं मिलेगा, तब तक जिला अस्पताल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ही नहीं, बल्कि पूरा स्वास्थ्य महकमा शक के घेरे में खड़ा रहेगा। वहीं सर्वव्यापी अपने आगामी अंकों में इस मामले की विस्तृत खबर प्रकाशित करेंगी।