तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ में होमगार्ड और नगर सेनानी जवानों से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रदेश के एक जिला सेनानी और अग्निशमन यंत्र अधिकारी की मिलीभगत से जवानों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है।सूत्रों के अनुसार, खनिज, आबकारी, परिवहन, राजस्व और नगर निगम जैसे विभागों में ड्यूटी लगाने के लिए जवानों से हर महीने “मासिक वसूली” की जाती है। इन विभागों को मलाईदार माना जाता है क्योंकि यहां ड्यूटी के दौरान जवानों को अतिरिक्त सुविधा और आर्थिक लाभ की संभावना रहती है।एक जवान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया किजिन्होंने पैसे दिए, उनकी ड्यूटी आबकारी और खनिज विभाग में लगाई जाती है। जो देने से इनकार करते हैं, उन्हें थका देने वाले सामान्य कार्यों में भेज दिया जाता है।”होमगार्ड जवानों का वेतन और भत्ते पहले से ही अन्य बलों की तुलना में बेहद कम हैं। समय पर भुगतान भी अक्सर नहीं होता। जवानों का कहना है कि इस जबरन वसूली ने उनकी आर्थिक स्थिति को और बदतर बना दिया है। महिनों तक वेतन नहीं मिलता, घर चलाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में अधिकारी जबरन वसूली करते हैं तो हमारे पास चुप रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता।सूत्रों का कहना है कि कई बार जवानों ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें या तो दूर-दराज़ इलाकों में भेज दिया गया या अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर डराया गया।इस पूरे मामले पर अब तक शासन-प्रशासन की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने इस पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।जानकारों का मानना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं बदली तो जवान सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हो सकते हैं। इसका असर कानून-व्यवस्था पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कई जिलों में सुरक्षा और आपातकालीन सेवाएं इन्हीं जवानों पर निर्भर रहती हैं।