परिवहन विभाग की मिलीभगत से टैक्स बकाया वाहनों को ‘क्लीन चिट’शासन के लाखों का राजस्व का डूबाने का खेल... पढ़ें पूरी खबर। - Sarvavyapi परिवहन विभाग की मिलीभगत से टैक्स बकाया वाहनों को ‘क्लीन चिट’शासन के लाखों का राजस्व का डूबाने का खेल... पढ़ें पूरी खबर। - Sarvavyapi

परिवहन विभाग की मिलीभगत से टैक्स बकाया वाहनों को ‘क्लीन चिट’शासन के लाखों का राजस्व का डूबाने का खेल… पढ़ें पूरी खबर।

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ के परिवहन विभाग में टैक्स वसूली को लेकर गंभीर लापरवाही और मिलीभगत का मामला उजागर हुआ है। शिकायतकर्ता अखिलेश पाठक द्वारा प्रस्तुत लिखित शिकायत में बताया गया कि वाहन स्वामी राजेन्द्र सोनी और उनकी धर्मपत्नी सीता सोनी के नाम दर्ज चार वाहनों पर लाखों रुपये का टैक्स बकाया है।

इसके बावजूद विभाग के अधिकारियों ने न केवल कार्रवाई टाल दी बल्कि बिना टैक्स वसूले ही “कोई बकाया नहीं” प्रमाण पत्र जारी कर शासन के राजस्व को हानि पहुँचाई।

वर्ष 2022 में क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण रायपुर द्वारा राजेन्द्र सोनी का परमिट नवीनीकरण इस शर्त पर किया गया था कि चार माह के भीतर सभी वाहनों का “नो ड्यूज सर्टिफिकेट” प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद भी टैक्स जमा नहीं हुआ। 24 अप्रैल 2025 को पुनः नोटिस जारी कर 7 दिन के भीतर बकाया जमा करने के निर्देश दिए गए, किंतु जून 2025 तक भी टैक्स अदा नहीं किया गया।

राजेन्द्र सोनी के नाम बिलासपुर RTO में दो वाहन (CG04E1903, CG15ZA0723) तथा उनकी पत्नी के नाम जांजगीर-चांपा RTO में दो वाहन (CG16A1194, CG11A6108) दर्ज हैं, जिन पर लाखों का टैक्स बकाया है।आरोप है कि जून 2025 में राजेन्द्र सोनी ने बिलासपुर RTO कार्यालय पहुँचकर केवल एक वाहन (CG04E1903) का उल्लेख करते हुए आवेदन दिया। शाखा प्रभारी मोनिका विश्वकर्मा ने बिना दस्तावेज जांचे और अन्य बकाया छुपाते हुए “कोई बकाया नहीं” प्रमाण पत्र जारी कर दिया।

चौंकाने वाली बात यह कि वाहन CG15ZA0723 के रिकॉर्ड और CG04E1903 पर बकाया की जानकारी पूर्व अधिकारी असीम माथुर द्वारा पहले ही मुख्यालय को भेजी जा चुकी थी, लेकिन शाखा प्रभारी ने यह तथ्य दबा दिया।

पूरा मामला और गहरा तब हुआ जब पता चला कि पूर्व RTO आनंद रूप तिवारी ने 4 जुलाई 2024 को वाहन CG04E1903 पर ₹2,59,900 का टैक्स असेसमेंट किया था। इसके बावजूद 27 नवंबर 2024 को उन्हीं के आदेश के खिलाफ जाकर टैक्स शून्य करने संबंधी पत्र जारी कर दिया गया। न तो उसकी नोटशीट उपलब्ध है, न ही अलग से कोई आदेश।RTI के तहत जब यह जानकारी मांगी गई कि यह पत्र किस लिपिक द्वारा तैयार किया गया, तो जानकारी नहीं दी गई।

शाखा प्रभारी मोनिका विश्वकर्मा ने खुद से पत्र बनाने से इंकार किया, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है कि आखिर शासन के राजस्व से खिलवाड़ किस स्तर पर हुआ।पूर्व RTO अधिकारी प्रेमप्रकाश पांडे, असीम माथुर, अमित बेक और आनंद रूप तिवारी सभी ने टैक्स असेसमेंट करके नोटिस राजेन्द्र सोनी को थमाए थे। बावजूद इसके न तो टैक्स जमा हुआ और न ही परमिट निरस्त किया गया।यह पूरा घटनाक्रम परिवहन विभाग की उदासीनता और मिलीभगत को उजागर करता है। शासन के लाखों रुपये टैक्स बकाया होने के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने कार्रवाई टाल दी, जिससे साफ जाहिर होता है कि राजस्व हानि का यह खेल बिना मिलीभगत संभव ही नहीं।वहीं राजेन्द्र सोनी बस आपरेटर है, जिसका वर्तमान में वाहन क्रमांक CG04E1903 संचालित है।

इस वाहन पर बैठक क्षमता को छलपूर्वक 32+1 बताकर परमिट प्रतिस्थापन किया गया है। आरोप है कि राजेन्द्र सोनी अपने और अपनी पत्नी के नाम पर दर्ज वाहनों का बकाया टैक्स अदा नहीं करना चाहता। इसलिए वह एकमात्र संचालित वाहन CG04E1903 और परमिट को बेचकर परिवहन विभाग के बकाया टैक्स से बचने के उद्देश्य से विभाग को गुमराह कर रहा है। झूठी शिकायत देकर, आरटीआई लगाकर लोगों को परेशान करना और ब्लैकमेल कर काम निकालना उसका मुख्य पेशा बताया गया है। वह रोजाना RTO कार्यालय जाता है लेकिन टैक्स वसूली की कार्रवाई सिर्फ इसलिए नहीं होती क्योंकि उसके खिलाफ झूठी शिकायत करने का डर अधिकारियों को है।

राजेन्द्र सोनी के विरुद्ध कई धाराओं में अपराध दर्ज हैं और वह फिलहाल जमानत पर है।शिकायतकर्ता अखिलेश पाठक ने शासन से विशेष अपील की है कि राजेन्द्र सोनी के नाम पर बिलासपुर RTO में दो और सीता सोनी के नाम पर जांजगीर-चांपा RTO में दर्ज दो वाहनों पर बकाया टैक्स की वसूली तत्काल की जाए।सुनवाई दिनांक 23 सितंबर 2025 को बिलासपुर संभाग के एजेंडा सरल क्रमांक 117 में परमिट अंतरण के आवेदन को बकाया टैक्स वसूली तक लंबित या निरस्त रखने की मांग की गई है।साथ ही, बकाया टैक्स वसूली तक वाहन क्रमांक CG04E1903 को जब्त करने की कार्यवाही करने का अनुरोध किया गया है।

इस संबंध में परिवहन मुख्यालय से पहले ही आदेश जारी है, किंतु तत्कालीन RTO आनंद रूप तिवारी ने वाहन स्वामी से सांठगांठ करके मुख्यालय के आदेश की अवहेलना की।


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