तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
बिलासपुर जिले में इन दिनों राजस्व और शिक्षा विभागों की कार्यप्रणाली देखकर यही लगता है कि दोनों विभाग अब “वोटर विशेषज्ञ” बन गए हैं। मतदाता पुनरीक्षण अभियान ऐसा चल रहा है, मानो यही सालाना परीक्षा हो और बाकी सरकारी काम महज़ छुट्टी पर हों।राजस्व विभाग, जिसे ज़मीन-जायदाद और कलेक्शन से फुर्सत नहीं मिलती, अब मतदाता सूची में नाम खोजने और जोड़ने का महायज्ञ कर रहा है। वहीं शिक्षा विभाग, जिसे बच्चों के ज्ञान और भविष्य की चिंता करनी चाहिए, अब वोटर कार्ड को ही “प्रमाण पत्र” मान बैठा है।हालत यह है कि शिक्षकों की कलम अब ब्लैकबोर्ड पर नहीं चल रही बल्कि फॉर्म 6 और फॉर्म 7 पर दौड़ रही है। वहीं पटवारी और नायब तहसीलदार ज़मीन नापने की बजाय मतदाता संख्या गिनने में व्यस्त हैं।जनता तंज कस रही है कि अगर यही हाल रहा तो अगली परीक्षा में बच्चों से पूछा जाएगा, मतदाता सूची में कुल कितने नाम जुड़े? और किसानों से पर्ची दी जाएगी ।आपके खेत की सिंचाई का हक वोटर आईडी पर निर्भर है।वाकई, बिलासपुर में विभागीय काम अब वोटर सूची की भेंट चढ़ चुका है। सवाल सिर्फ इतना है कि क्या विकास भी मतदाता पुनरीक्षण पूरा होने के बाद ही होगा?


