तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
बिलासपुर संभाग के कोरबा जिले की राजनीति में अचानक भूचाल आ गया है। भाजपा के पूर्व कद्दावर मंत्री ननकी राम कंवर ने अपने गृह जिले कोरबा में कलेक्टर अजीत वसंत के खिलाफ धरना शुरू कर दिया है। धरने की वजह कलेक्टर पर स्थानीय प्रशासनिक मामलों में पक्षपात और जनता की अनदेखी करने का आरोप बताया जा रहा है।धरना स्थल पर ननकी राम कंवर ने समर्थकों के साथ जमकर प्रदर्शन किया, जिससे प्रशासनिक कार्यों में रुकावटें भी देखने को मिलीं। नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ प्रशासनिक विवाद नहीं है, बल्कि राजनीतिक दबाव और स्थानीय समीकरणों का परिणाम है। विशेष बात यह है कि इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मुख्य सचिव अमिताभ जैन की चुप्पी ने राजनीतिक गलियारों में अजीब सा तनाव पैदा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सरकार इस विवाद में तुरंत कोई ठोस कदम उठाने से बच रही है, ताकि भाजपा के आंतरिक समीकरण प्रभावित न हों।स्थानीय जनता और विपक्षी दल इस चुप्पी को लेकर खफा हैं। जनता का कहना है कि यदि धरना लंबा चला तो जिले में प्रशासनिक कामकाज ठप हो सकता है और सरकारी योजनाओं की गति धीमी पड़ सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ननकी राम कंवर की यह पहल भाजपा के स्थानीय नेतृत्व और सत्ता समीकरणों पर भी बड़ा असर डाल सकती है। अब सवाल यह है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मुख्य सचिव अमिताभ जैन कब इस मसले पर स्पष्ट बयान देंगे या कार्रवाई करेंगे, क्योंकि धरना अभी भी जारी है और कोरबा का प्रशासन पूरी तरह तनाव में है।कुछ सूत्रों का कहना है कि यह धरना चुनावी समय से पहले भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है। विपक्ष इसे सरकार की कमजोरी और चुप्पी का प्रमाण बता रहा है। समर्थकों का कहना है कि धरना तब तक जारी रहेगा जब तक कलेक्टर को हटाने का आदेश नहीं आता। कोरबा की राजनीति फिलहाल तनाव और अनिश्चितता के बीच झूल रही है, और जनता की नजरें सरकार की अगली चाल पर टिकी हैं।


