कबीरधाम/चेतन साहू/ ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ में भाजपा की विष्णु देव साय सरकार सत्ता संभालने के बाद से अब तक निगम-मंडल, आयोग, बोर्ड और जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियों पर सिर्फ टालमटोल कर रही है। नवरात्रि का दूसरा दिन भी गुजर गया, लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से कोई घोषणा नहीं हुई। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि “त्योहार पर फैसला होगा”, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मुख्यमंत्री सचिवालय और भाजपा प्रदेश कार्यालय दोनों जगह इस मुद्दे पर सन्नाटा पसरा हुआ है।भाजपा कार्यकर्ता जो चुनाव में दिन-रात खून-पसीना बहाकर सत्ता में पार्टी को लेकर आए थे, अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। नियुक्तियों की देरी से यह संदेश जा रहा है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय न तो कार्यकर्ताओं की परवाह कर रहे हैं और न ही संगठन के दबाव को महत्व दे रहे हैं।प्रदेशभर में खाली पड़े सैकड़ों पद इस बात की गवाही दे रहे हैं कि सरकार का “निर्णय तंत्र” ठप है। सत्ता भोग में व्यस्त भाजपा नेतृत्व को यह समझना चाहिए कि नियुक्तियों की यह अनिश्चितता सीधे-सीधे भाजपा की आंतरिक गुटबाजी और मुख्यमंत्री की कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति को उजागर कर रही है।विपक्ष ने भी अब सीधा हमला बोलना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि “साय सरकार ने कार्यकर्ताओं को सिर्फ झूठे सपने दिखाए, सत्ता मिली तो कुर्सियों पर अपने चहेतों को जमाने में व्यस्त हैं, आम कार्यकर्ता और जनता के वादों की उन्हें कोई परवाह नहीं है।अब बड़ा सवाल यही है कि क्या नवरात्रि में देवी आराधना करते-करते मुख्यमंत्री को निर्णय लेने का साहस मिलेगा, या फिर नियुक्तियों का यह मुद्दा आगे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?


