तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की राजनीति का दरबार सज चुका है। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भले विष्णुदेव साय विराजमान हों, मगर सत्ता का असली सिंहासन संगठन महामंत्री पवन साय के पास है। राजनीति के गलियारों में अब यह बात खुलेआम कही जाती है कि भाजपा की सरकार सायासत पर चल रही है, जहां हर फैसले का पहला और आख़िरी इशारा पवन साय का होता है।कभी एक जिले में संघ प्रचारक के रूप में साधारण जीवन जीने वाले पवन साय, आज भाजपा संगठन के बादशाह बन गए हैं। उनके दरबार में हाज़िरी देने के बिना कोई मंत्री, कोई विधायक और कोई महत्वाकांक्षी नेता मंज़िल तक नहीं पहुंच सकता। निगम-मंडल की नियुक्तियां हों, आयोग-बोर्ड की लिस्ट बने या मंडी-बैंक के चेयरमैन तय हों हर जगह पवन साय की मुहर राजकीय फरमान बन चुकी है। यह हम नहीं खुद भाजपा के वरिष्ठ नेता कहते नजर आ रहे हैं। भाजपा के भीतर अब एक कहावत चल पड़ी है ,मुख्यमंत्री आदेश लिखते हैं, पर आदेश की स्याही पवन साय की सहमति से ही गीली होती है।दरबार का आलम यह है कि भाजपा के छोटे-बड़े नेता मानो दरबारी प्रजा बन गए हों, जिनकी निगाहें बादशाह पवन साय की चौखट पर टिकी रहती हैं। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि आज छत्तीसगढ़ की राजनीति में सबसे ताक़तवर पद संगठन महामंत्री का है, जो मुख्यमंत्री से भी ऊंचा माना जा रहा है।राजनीतिक पर्यवेक्षक कहते हैं कि भाजपा का किला इस समय दो स्तंभों पर टिका है, पहला मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, दूसरा पवन साय। फर्क बस इतना है कि जनता मुख्यमंत्री को देखती है, लेकिन नेता और कार्यकर्ता केवल पवन साय की तरफ़ देखते हैं। आज छत्तीसगढ़ भाजपा में हालात ऐसे हैं कि हर दिशा से एक ही स्वर गूंजता है, साय ही साय… राजनीति का बादशाह वही..!


