बिलासपुर लोकसभा : तीनों साहू सांसदों में तोखन साहू ही बने जनता की पहली पसंद। - Sarvavyapi बिलासपुर लोकसभा : तीनों साहू सांसदों में तोखन साहू ही बने जनता की पहली पसंद। - Sarvavyapi

बिलासपुर लोकसभा : तीनों साहू सांसदों में तोखन साहू ही बने जनता की पहली पसंद।

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा ने लगातार तीन बार साहू समाज के नेताओं को मौका दिया। लखनलाल साहू, अरुण साव और वर्तमान सांसद तोखन साहू तीनों ही मुंगेली जिले से आते हैं। संयोग यह कि तीनों ने लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया, किंतु जनता के बीच लोकप्रियता और विकास के दृष्टिकोण से इनकी छवि अलग-अलग रही है।वही बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के जनता कहते हैं कि वर्तमान उप मुख्यमंत्री,लोरमी विधायक अरुण साव के लोकसभा कार्यकाल को जनता आज भी ‘निष्क्रिय काल’ के रूप में याद करती है। उनके सांसद रहते ही कोरोना महामारी का दौर आया। रेलवे ने अनेक यात्री गाड़ियां बंद कर दीं। यह गाड़ियां विशेषकर बिल्हा, कोटा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही क्षेत्र के लोगों की जीवनरेखा थीं।जनता बार-बार उनसे इन गाड़ियों को चालू कराने की गुहार लगाती रही, लेकिन कोई ठोस पहल सामने नहीं आई। नतीजतन, स्थानीय स्तर पर असंतोष गहराता गया।इसके विपरीत, वर्तमान सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने जिम्मेदारी संभालते ही सक्रियता का परिचय दिया। बंद पड़ी अधिकांश यात्री गाड़ियों को पुनः चालू कराया गया। इससे न केवल यात्रियों को सुविधा मिली, बल्कि व्यापार, शिक्षा और रोजगार से जुड़े लोगों को भी राहत पहुंची।तोखन साहू ने लोकसभा में रेलवे, सड़क, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों को मजबूती से उठाया। मंत्रालयों से जवाबदेही मांगने और ठोस परिणाम दिलाने में उनकी भूमिका स्पष्ट दिखी।वहीं जनता का कहना है कि पूर्व सांसद लखनलाल साहू परंपरागत कार्यशैली, साधारण प्रदर्शन रहा। पूर्व सांसद अरुण साव वर्तमान में उप मुख्यमंत्री, किंतु सांसद रहते जनता के मुद्दों पर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा पाए। जबकि वर्तमान सांसद तोखन साहू ने अल्प समय में ठोस कार्य, रेलवे सेवाओं की बहाली और लोकसभा में सक्रिय उपस्थिति।बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र की जनता का अनुभव बताता है कि प्रतिनिधित्व केवल जातीय समीकरणों पर नहीं, बल्कि कार्य और परिणामों पर आधारित होना चाहिए। साहू समाज से लगातार तीन सांसद बने, लेकिन जनता के वास्तविक हितों की पूर्ति करने वाले नेता के रूप में तोखन साहू की पहचान सबसे सशक्त रही है।


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