तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
बिलासपुर में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 7(1) के तहत प्रत्येक आवेदन पर 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध कराना अनिवार्य है, लेकिन नगर निगम बिलासपुर में इस कानून की खुलेआम अवहेलना की जा रही है।युवक अनिल कुमार पाली ने नगर निगम में आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया था। निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बाद भी अब तक सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई और न ही सूचना न देने का कोई कारण बताया गया। इस रवैये से क्षुब्ध होकर युवक ने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर सूचना अधिकार प्रकोष्ठ को बंद करने की मांग की है।उनका कहना है कि जब सूचना समय पर नहीं दी जाती और अधिकारी जवाब देने से बचते हैं, तो सूचना अधिकार प्रकोष्ठ केवल औपचारिकता और दिखावा बनकर रह गया है। यह स्थिति न केवल आरटीआई अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन भी है।आवेदक ने चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाती, तो इसकी शिकायत राज्य सूचना आयोग रायपुर में की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर जन आंदोलन भी किया जाएगा। साथ ही उन्होंने दोषी अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की मांग की है।


