नूर मोहम्मद/ गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही/ (सर्वव्यापी)

उत्तर प्रदेश के कानपुर में “आई लव मोहम्मद” लिखे पोस्टर लगाने वाले 20 मुस्लिम युवकों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर ने अब तूल पकड़ लिया है। इस प्रकरण के विरोध में देशभर में मुस्लिम समुदाय जगह-जगह शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और रैलियां निकालकर अपना रोष जता रहा है। इसी कड़ी में गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिले के मुस्लिम विकास मंच की अगुवाई में ज्योतिपुर के लाल बंगला मैदान में विशाल धरना-प्रदर्शन हुआ।ईद-ए-मिलादुन्नबी के मौके पर उपजा विवादईद-ए-मिलादुन्नबी, यानी पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैदाइश का दिन, पूरी दुनिया में मोहब्बत और भाईचारे का पैग़ाम लेकर आता है। इसी मौके पर कानपुर शहर में कुछ युवकों ने मोहब्बत और श्रद्धा के प्रतीक के रूप में “आई लव मोहम्मद” लिखे पोस्टर शहर में लगाए। लेकिन देखते ही देखते यह धार्मिक अभिव्यक्ति विवाद का कारण बन गई और स्थानीय पुलिस ने 20 मुस्लिम युवकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी। इस कार्रवाई को लेकर मुस्लिम समाज में गहरा आक्रोश फैल गया। लोगों का कहना है कि यह संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है।लाल बंगला मैदान में उमड़ा हुजूम।धरना-प्रदर्शन के दौरान लाल बंगला मैदान खचाखच भरा हुआ था। उलेमाओं, समाजसेवियों और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने हिस्सा लिया। मंच से संबोधित करते हुए उलेमाओं ने कहा कि पैग़म्बर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमेशा अमन, इंसाफ और मोहब्बत का संदेश दिया। उनके जीवन से सादगी और इंसानियत की शिक्षा मिलती है। ऐसे में उनके नाम से मोहब्बत का इज़हार करना कोई अपराध नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि अगर मुसलमान भाई “आई लव मोहम्मद” लिखते या बोलते हैं, तो यह उनकी आस्था का हिस्सा है और इसे रोकने का कोई भी प्रयास अलोकतांत्रिक है। मुस्लिम विकास मंच के जिला अध्यक्ष असद सिद्दीकी ने कहा कि देश का हर नागरिक अपनी धार्मिक और सामाजिक आस्था व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र है। बावजूद इसके मुसलमानों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब बड़े-बड़े अपराध होते हैं तो एफआईआर दर्ज करने में हफ्तों लग जाते हैं, मगर मुस्लिम समाज की बात आते ही तुरंत कार्रवाई कर दी जाती है। उन्होंने कहा “हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हम सबकी जान से भी प्यारे हैं। आई लव मोहम्मद लिखने-बोलने से हमें कोई नहीं रोक सकता। इसके लिए हम एक नहीं, हजारों एफआईआर झेलने को तैयार हैं।” धरना-प्रदर्शन शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। इसके बाद सभी प्रदर्शनकारी रैली के रूप में कलेक्टर कार्यालय की ओर रवाना हुए। रानी दुर्गावती तिराहा पर अपर कलेक्टर, तहसीलदार, एसडीओपी और थाना प्रभारी पहले से मौजूद थे। यहां मुस्लिम विकास मंच के पदाधिकारियों और उलेमाओं ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा।ज्ञापन में मांग की गई कि कानपुर के मुस्लिम युवकों पर दर्ज एफआईआर को तत्काल वापस लिया जाए और समाज के साथ किए जा रहे भेदभावपूर्ण रवैये पर रोक लगाई जाए।प्रदर्शनकारियों की भावनाएँप्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि पैग़म्बर मोहम्मद साहब की शिक्षाएँ इंसानियत और भाईचारे की मिसाल हैं। उनका नाम मोहब्बत और इज्ज़त से लेना हर मुसलमान का ईमान है। उन्होंने कहा कि अगर यह अपराध है तो हम सब इस अपराध में शामिल होने को तैयार हैं।लोगों ने प्रशासन से अपील की कि मुसलमानों को अलग-थलग करने की कोशिशें बंद हों और सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकारों के साथ जीने दिया जाए।प्रशासन की भूमिका धरना स्थल से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक पुलिस और प्रशासनिक अमला मुस्तैद रहा। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की और भरोसा दिलाया कि उनकी मांगें राष्ट्रपति तक पहुंचाई जाएंगी। जिलेभर से उमड़ा मुस्लिम समुदाय इस धरना-प्रदर्शन में गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिले के कई इलाकों से बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए। और युवाओं की भी सक्रिय भागीदारी रही। सबने एक स्वर में कहा कि मोहम्मद साहब से अपनी मोहब्बत जताना उनका ईमान है और इसके लिए कोई भी कानून उन्हें नहीं रोक सकता।कानपुर की घटना ने जहां एक ओर विवाद खड़ा कर दिया है, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समाज के बीच एकजुटता भी बढ़ाई है। गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही में हुए इस धरना-प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि“आई लव मोहम्मद” लिखना किसी भी तरह से अपराध नहीं माना जा सकता। यह मुसलमानों की आस्था और श्रद्धा का हिस्सा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और क्या कानपुर के युवकों पर दर्ज एफआईआर वापस ली जाती है या नहीं।


