तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ प्रशासनिक हलकों में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होने जा रहा है। 30 तारीख को विकास शील मुख्य सचिव का पद ग्रहण करेंगे। जैसे ही यह खबर पुख्ता हुई, सीनियर आईएएस अफसरों के बीच हलचल तेज हो गई है।राज्य के प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि कई वरिष्ठ अफसर, जिनका अनुभव और सेवा अवधि विकास शील से कहीं अधिक है, उन्हें एक बार फिर दरकिनार कर दिया गया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या अब “वरिष्ठता” का महत्व खत्म हो चुका है और “सियासी समीकरण” ही सबसे बड़ा पैमाना बन गया है?विकास शील की नियुक्ति के साथ ही यह मुद्दा गरम है कि उनके ऊपर के अफसरों का क्या होगा? क्या वे ठंडे बस्ते में चले जाएंगे, क्या उन्हें महत्वहीन पदों पर समायोजित किया जाएगा, या फिर सरकार अपने हिसाब से उन्हें “किनारे” कर देगी?राज्य की ब्यूरोक्रेसी अब दो खेमों में बंटती दिख रही है । एक तरफ वो अफसर जो विकास शील के साथ खड़े हैं और दूसरी तरफ वो वरिष्ठ अफसर, जो खुद को नज़रअंदाज किए जाने से आहत महसूस कर रहे हैं।सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में कुछ अफसर “वैकल्पिक विकल्प” तलाश सकते हैं, तो कुछ मजबूरी में चुपचाप सत्ता के इस नए फैसले को स्वीकार करेंगे।छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन में इस फैसले ने भूचाल ला दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि “मुख्य सचिव की कुर्सी पर विकास शील बैठेंगे, लेकिन वरिष्ठ अफसरों की ‘सीनियरिटी’ का क्या होगा?”


